केतन अग्रवाल हत्याकांड में चौकाने वाला खुलासा

केतन अग्रवाल हत्याकांड में चौकाने वाला खुलासा

केतन अग्रवाल हत्याकांड: वारदात से पहले सिया गोयल ने राजा रघुवंशी मर्डर केस खंगाला, मोबाइल सर्च हिस्ट्री से हुआ बड़ा खुलासा

केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल ने वारदात से पहले राजा रघुवंशी केस किया था सर्च

                            पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल ने कथित वारदात से पहले इंटरनेट पर इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी खबरें और जांच प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके अलावा उसने यह भी सर्च किया था कि क्या पुलिस हिरासत में महिलाओं के साथ मारपीट होती है?जांच एजेंसियों के मुताबिक यह जानकारी सिया गोयल के कब्जे से जब्त किए गए दोनों मोबाइल फोन की सर्च हिस्ट्री से मिली है। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में मिले ये तथ्य अब पुलिस के लिए अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं।

मोबाइल सर्च हिस्ट्री बनी जांच का अहम आधार

पुलिस के अनुसार जब्त मोबाइल फोन के डेटा की जांच के दौरान पता चला कि सिया गोयल ने हत्या से पहले कई संवेदनशील विषयों पर इंटरनेट पर जानकारी खोजी थी। इनमें सबसे प्रमुख इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ी रिपोर्टें थीं।

इसके साथ ही उसने पुलिस पूछताछ, महिला आरोपियों के अधिकार और पुलिस कस्टडी में व्यवहार जैसे विषयों पर भी ऑनलाइन जानकारी जुटाई थी। जांच अधिकारी इसे सामान्य इंटरनेट ब्राउज़िंग न मानकर मामले की जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

राजा रघुवंशी केस में क्यों दिखाई दिलचस्पी?

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर सिया गोयल ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की जानकारी क्यों जुटाई। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि वह ऐसे मामलों में पुलिस जांच की कार्यप्रणाली, डिजिटल सबूतों की भूमिका और गिरफ्तारी के बाद की कानूनी प्रक्रिया को समझने का प्रयास कर रही थी।

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।

पुलिस हिरासत को लेकर भी किया था इंटरनेट सर्च

पुलिस सूत्रों के अनुसार सिया गोयल ने इंटरनेट पर यह भी खोजा था कि यदि किसी महिला को पुलिस हिरासत में लिया जाता है तो पूछताछ की प्रक्रिया कैसी होती है और क्या पुलिस द्वारा मारपीट की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी आरोपी की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री जांच में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है, लेकिन केवल सर्च हिस्ट्री के आधार पर अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसे अन्य डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखा जाता है।

डिजिटल फॉरेंसिक पर टिकी जांच

पुणे पुलिस इस पूरे मामले में डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दे रही है। मोबाइल फोन से प्राप्त चैट, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस मामले की आगे की जांच को आगे बढ़ा रही है।

क्या है केतन अग्रवाल हत्याकांड?

पुलिस के अनुसार केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में सामान्य घटना माना गया था, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे कथित हत्या की आशंका मजबूत हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए मुख्य आरोपी सिया गोयल सहित अन्य संदिग्धों से पूछताछ शुरू की।जांच में अब डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा और अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों को प्रमुख आधार बनाया गया है।

                 पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन से प्राप्त डेटा का विश्लेषण अभी पूरा नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।फिलहाल पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही है। इसलिए जांच पूरी होने तक इस मामले में सामने आ रही जानकारियों को प्रारंभिक जांच का हिस्सा माना जा रहा है।

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