नीट परीक्षा में पेपर लीक के बाद मोदी सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के मामले में घिरी है। देश भर से सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो और तस्वीरें पोस्ट की जा रही हैं, जिनमें इथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ियों को होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है। लोग बता रहे हैं कि इससे गाड़ियों के इंजन को नुकसान हो रहा है और माइलेज कम हो रही है। इसे लेकर सरकार की ओर से शनिवार को सफाई दी गई। सरकार के विशेषज्ञों सहित इस मामले के जानकारों की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। मारूति कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने भी प्रेस से बात की। सरकार की ओर से बताया गया कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का काम रातों रात नहीं हुआ। यह एक जांची परखी, साइंटिफिक और चरणबद्ध तरीके से की गई प्रक्रिया है। सरकार ने कहा है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की ग्लोबल प्रैक्टिस अपनाई है और टॉप एजेंसियां भी इसका टेस्ट कर चुकीं हैं।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का देश भर में हो रहे विरोध पर दिल्ली में हुई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला ने बताया कि देश में साल 2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में सिर्फ डेढ़ फीसदी इथेनॉल मिलाया जा रहा था। अब इस प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग की जा रही है, जिसे ई20 पेट्रोल नाम दिया गया है। गौरतलब है कि 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद भी पेट्रोल के दाम लगभग पूरे देश में सौ रुपए लीटर से ज्यादा हैं। गौरतलब है कि भारत में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल के मिश्रण वाले ई20 पेट्रोल का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि इथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है।
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