मुख्य चुनाव आयुक्त पर फिर घमासान, विपक्ष संसद से सड़क तक करेगा मोर्चाबंदी

मुख्य चुनाव आयुक्त पर फिर घमासान, विपक्ष संसद से सड़क तक करेगा मोर्चाबंदी

नई दिल्ली | भारतभवः 

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों ने उन्हें पद से हटाने की मांग को आगे बढ़ाते हुए संसद में दोबारा प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त विपक्ष की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव के नोटिस जल्द दिए जा सकते हैं। इस विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में ऐसे सवाल कई बार उठाए गए। हालांकि इन रिपोर्टों और विपक्ष के आरोपों को उनके संबंधित दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

                              यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानेश कुमार को हटाने का मुद्दा संसद में उठा है। अप्रैल में विपक्ष की ओर से दोनों सदनों में प्रस्ताव दिए गए थे। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उस समय लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था। मार्च में लोकसभा के प्रस्ताव पर 130 और राज्यसभा के प्रस्ताव पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए थे। अब विपक्ष फिर से इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि इस बार प्रस्ताव कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद तैयार किया जा रहा है। संसदीय रणनीति के साथ कांग्रेस ने आंदोलन को सड़क तक ले जाने का भी कार्यक्रम बनाया है। पार्टी ने 25 सितंबर को देशभर में राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च का आह्वान किया है। इसके बाद 28 सितंबर को जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यालयों तक मार्च का कार्यक्रम बताया गया है। विभिन्न राज्यों में शुक्रवार को प्रदर्शन शुरू होने की खबरें भी सामने आई हैं। कांग्रेस इन प्रदर्शनों के जरिए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है, कोई स्थापित न्यायिक निष्कर्ष नहीं।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा

इस पूरे विवाद का एक संवैधानिक और कानूनी पहलू भी है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी प्रक्रिया से जुड़ी है। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया और विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल किसी एक व्यक्ति का पद नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और SIR जैसी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले से बहस चल रही है। ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

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