UPI पेमेंट पर शुल्क का फैसला टला, विरोध के आगे सरकार ने बदला रुख!

UPI पेमेंट पर शुल्क का फैसला टला, विरोध के आगे सरकार ने बदला रुख!

त्योहारी सीजन में डिजिटल भुगतान पर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी को झटका, व्यापारियों के विरोध के बीच दिवाली तक टला फैसला

देश में डिजिटल भुगतान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब त्योहारों के बाजार में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता है और व्यापारी संगठन नए शुल्क का विरोध कर रहे हैं।प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी थी। इसके तहत दुकानदारों को ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कुल राशि का 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क देना पड़ता। हालांकि, विरोध और त्योहारी कारोबार पर संभावित असर को देखते हुए इसे फिलहाल आगे बढ़ा दिया गया है।

त्योहारों के बाजार में शुल्क का असर पड़ने की आशंका

दशहरा और दिवाली के दौरान कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, आभूषण और अन्य सामानों की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में UPI भुगतान छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए अहम माध्यम बन चुका है। व्यापारी संगठनों की चिंता थी कि भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से कारोबारियों की लागत बढ़ेगी और इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में आवाजें तेज हुईं। कारोबारियों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाने से लोग दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क लगाए जाने की बात कही गई थी। कुछ श्रेणियों के भुगतान के लिए अलग निश्चित शुल्क का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, इन शुल्कों की वास्तविक लागू स्थिति और अंतिम नियमों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की चर्चा के बीच व्यापारियों ने संभावित आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठाए। दिवाली तक फैसले को टालना तत्काल राहत जरूर माना जा सकता है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था हमेशा के लिए वापस ले ली गई है।यदि शुल्क लगाने की योजना आगे बढ़ती है, तो सरकार और संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल भुगतान की सुविधा, पारदर्शिता और कारोबारी हितों के बीच संतुलन बना रहे।भारत में UPI ने छोटे दुकानदारों, ग्राहकों और कारोबारियों के बीच भुगतान को सरल बनाया है। इसकी सफलता का बड़ा कारण है कि लोग बिना नकदी साथ रखे आसानी से लेनदेन कर सकते हैं। ऐसे में शुल्क से जुड़ा कोई भी फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।फिलहाल, दिवाली तक मिली मोहलत ने कारोबारियों को राहत दी है। लेकिन असली सवाल अब भी कायम है—क्या डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था पर अतिरिक्त शुल्क उचित होगा, और यदि ऐसा हुआ तो उसका बोझ आखिरकार किसे उठाना पड़ेगा: दुकानदार को या ग्राहक को?

https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV?sub_confirmation=1

⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए  कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद ।

 

Share this...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *