नई दिल्ली। भारतभवः
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 सितंबर से नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में शुरू हुआ। इस बैठक का उद्देश्य सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करने के साथ आने वाले वर्षों के लिए नीतिगत प्राथमिकताओं और सुधारों की दिशा तय करना है। इसका व्यापक फोकस ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य पर है।पहले दिन मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में चर्चा के लिए बांटा गया। मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों के काम, उपलब्धियों, योजनाओं की प्रगति और आगे की रणनीति पर प्रस्तुतियां दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन समूहों के साथ सीधे संवाद किया।
इस चिंतन शिविर में केवल मंत्रालयों की उपलब्धियों पर चर्चा नहीं हो रही, बल्कि शासन व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार, योजनाओं की बेहतर डिलीवरी, मंत्रालयों के बीच तालमेल और नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं। पहले दिन युवाओं और महिलाओं तक सरकारी योजनाओं की पहुंच तथा जनविश्वास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मंत्रियों के प्रदर्शन की ‘Excellent, Good, Average और Poor’ जैसी चार श्रेणियों में समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक/विश्वसनीय रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी ग्रेडिंग के आधार पर किसी मंत्री को हटाने का निर्णय तय किया गया है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित आंतरिक मूल्यांकन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कैबिनेट फेरबदल को लेकर भी अलग-अलग अटकलें सामने आई हैं, लेकिन द ट्रिब्यून ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस चिंतन शिविर को तत्काल मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी के रूप में नहीं देखा जा रहा।
इस बैठक का बड़ा सवाल यही है कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को सरकारी योजनाओं और नीतियों के स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, सुधारों की गति, अनुपालन का बोझ कम करना और सरकारी सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना प्रमुख विषय हैं।
https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV?sub_confirmation=1
⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद ।

