शाहगढ़ में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला करने का आरोप, पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ दर्ज किया मामला
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के शाहगढ़ क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमले का मामला सामने आया है। रविवार रात निवाही गांव में कार्रवाई करने पहुंची टीम पर कथित तौर पर 8 से 10 लोगों ने हमला कर दिया। घटना में डिप्टी रेंजर शैलेंद्र तिवारी और वनपाल नारायण सिंह पलिया घायल हो गए। डिप्टी रेंजर के सिर में गंभीर चोट आई है, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें कथित तौर पर एक ट्रैक्टर तेजी से आगे बढ़ता दिखाई देता है। आरोप है कि इस दौरान ट्रैक्टर का पिछला पहिया एक व्यक्ति के ऊपर से गुजर गया। वीडियो में दिखाई देने वाली घटना और चोटों की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अतिक्रमण की सूचना पर पहुंची थी टीम
डिप्टी रेंजर शैलेंद्र तिवारी के अनुसार, निवाही गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर विवाद की सूचना मिली थी। रविवार रात कुछ लोग ट्रैक्टर से जमीन की जुताई कर रहे थे। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ट्रैक्टर जब्त करने की कार्रवाई शुरू की।इसी दौरान विवाद बढ़ गया। आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने वनकर्मियों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में डिप्टी रेंजर शैलेंद्र तिवारी और वनपाल नारायण सिंह पलिया घायल हो गए। घटना के बाद घायलों को पहले शाहगढ़ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।घटनाक्रम के दौरान ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास भी किया गया। आरोप है कि चालक ट्रैक्टर लेकर मौके से भाग निकला। वीडियो में ट्रैक्टर की गतिविधियों को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी तक ट्रैक्टर जब्त नहीं किया है और चालक की पहचान तथा गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। वन विभाग की शिकायत पर शाहगढ़ पुलिस ने निवाही निवासी हरिराम यादव, अमित यादव और हरेन्द्र यादव के खिलाफ मारपीट, शासकीय कार्य में बाधा सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की तलाश की जा रही है और उन्हें पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें जुटी हैं।वन भूमि से अतिक्रमण रोकने गई सरकारी टीम पर हमला होने की यह घटना कानून-व्यवस्था और मैदानी कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती है। वन विभाग के कर्मचारी जब अतिक्रमण रोकने या सरकारी भूमि की रक्षा करने पहुंचते हैं, तो उनके सामने कई बार विरोध और विवाद की स्थिति बन जाती है।
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