‘सनातन हिंदू एकता रथयात्रा ” गरबा पंडाल में गोमूत्र पिलाकर दें एंट्री – धीरेन्द्र शास्त्री

‘सनातन हिंदू एकता रथयात्रा ” गरबा पंडाल में गोमूत्र पिलाकर दें एंट्री – धीरेन्द्र शास्त्री

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी 5 दिवसीय सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के सागर जिले गढ़ाकोटा में गरबा पंडालों और लव जिहाद को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के गरबा आयोजनों में नाम बदलकर आने वाले गैर.हिंदुओं की पहचान करने के लिए प्रवेश द्वार पर ही गोमूत्र पिलाकर एंट्री देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने युवतियों को संबोधित करते हुए कहा कि बेटियों! तुम दुर्गा बनना काली बनना लेकिन कभी बुर्के वाली मत बनना।
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 500 किलोमीटर लंबी सनातन हिंदू एकता रथयात्रा निकाल रहे हैं। 11 अक्टूबर से शुरू हुई यह यात्रा जब 13 अक्टूबर की रात सागर जिले के गढ़ाकोटा पहुंची तो वहां आयोजित एक मंचीय कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने गरबा पंडालों में प्रवेश और लव जिहाद के मुद्दे पर तीखे बयान दिए।

गरबा में एंट्री के लिए गोमूत्र पिलाने का सुझाव

नवरात्रि के दौरान गरबा पंडालों में गैर.हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रही बहस के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने आयोजकों को एक अनोखा सुझाव दिया। उन्होंने मंच से कहा नवरात्र का पर्व चल रहा है। गरबा में धर्म विरोधी लोग नाम और पहचान बदलकर आएंगे। इसलिए गरबा पंडालों में बाहरी लोगों को गोमूत्र पिलाकर ही एंट्री दी जानी चाहिए। जो गोमूत्र पी लेगा वह हिंदू होगा और जो मना करेगा वह अंदर नहीं जा पाएगा। कम से कम इस बहाने उनकी घर वापसी;शुद्धिकरण तो हो जाएगी।उन्होंने आगे तर्क दिया कि इस्लाम में मूर्ति पूजा पूरी तरह वर्जित है जबकि गरबा और दुर्गा पूजा पूरी तरह से मूर्ति पूजन के त्योहार हैं। ऐसे में जो लोग मूर्ति पूजा को नहीं मानते उनका गरबा पंडालों में आने का कोई औचित्य नहीं है। लव जिहाद के मुद्दे पर बोलते हुए बागेश्वर बाबा ने सनातन धर्म की युवतियों और बेटियों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की रील्स और बाहरी आकर्षण के चक्कर में आकर किसी दूसरे मजहब के व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। बेटियों को हौसला देते हुए उन्होंने नारा दिया बेटियों तुम दुर्गा बनना काली बनना लेकिन कभी भी बुर्केवाली मत बनना। उनके इस बयान पर पंडाल में मौजूद समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की वहीं दूसरी तरफ इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में विरोध भी शुरू हो गया है।

सामाजिक समरसता और नशामुक्ति की भी अपील

अपनी इस 5 दिवसीय रथयात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने केवल धार्मिक मुद्दों पर ही नहीं बल्कि सामाजिक सुधारों पर भी बात की। उन्होंने मंच से हिंदुओं से जातिवाद को खत्म करने का संकल्प दिलाया और नारा दिया जात.पात की करो विदाई हम सब हिंदू भाई भाई। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से शराब और अन्य नशीले पदार्थों को त्यागकर अपने.अपने गांवों को नशामुक्त बनाने का भी आह्वान किया। यह रथयात्रा 15 अक्टूबर को टीकमगढ़ में समाप्त होगी।

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