हिरासत से नहीं थमेगा आंदोलन! CJP का ऐलान

हिरासत से नहीं थमेगा आंदोलन! CJP का ऐलान

फिर जंतर-मंतर कूच, चुनाव आयोग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ व्यापक पुलिस कार्रवाई और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे एक बार फिर जंतर-मंतर कूच करने का ऐलान किया है। पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।शनिवार को दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भी हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं।इसके बावजूद पार्टी का कहना है कि नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। अजिंक्य शिंदे ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि सरकार को शायद लगा होगा कि कार्रवाई के जरिए विरोध की आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन आंदोलन अभी शुरू हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र की चिंता से बढ़ा मामला

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों को बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने की खबरों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई है। इससे पुलिस कार्रवाई और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।

हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की स्थिति और रिहाई से संबंधित पूरी जानकारी सामने आना अभी बाकी है। शनिवार शाम नेहा बोरा सहित कुछ प्रदर्शनकारियों को मैदानगढ़ी थाने से रिहा किए जाने की खबर भी आई।

सोनम वांगचुक की चेतावनी

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वे अनशन या पदयात्रा शुरू करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इससे आंदोलन के और व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है।CJP के दोबारा जंतर-मंतर पहुंचने के ऐलान ने साफ कर दिया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद विरोध की राजनीति थमती दिखाई नहीं दे रही। अब निगाहें रविवार के घटनाक्रम पर रहेंगी—क्या प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगों पर सरकार से बातचीत का रास्ता मिलेगा या टकराव और बढ़ेगा?फिलहाल आंदोलन की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और प्रदर्शनकारी संवाद का रास्ता चुनते हैं या विरोध और कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता है।

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