आबकारी विभाग और पुलिस पर गिरी गाज, कई अधिकारी निलंबित | ललितपुर से शराब सप्लाई का शक | मिथाइल अल्कोहल की आशंका ने बढ़ाई चिंता
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। नौराज और गूगरा खुर्द क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद अब तक 11 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 35 लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ मरीजों के शरीर नीले पड़ने और अकड़न जैसे गंभीर लक्षण सामने आने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
मौतों के बाद प्रशासन में हड़कंप
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आबकारी विभाग और पुलिस के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की है। सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा की आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते को निलंबित किया गया है।इसके अलावा गूगरा चौकी प्रभारी ASI पूरन सिंह और बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र कुशवाहा को भी निलंबित किया गया है। संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरज श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है।कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, कुछ शवों के पोस्टमॉर्टम में मिथाइल अल्कोहल के सेवन की आशंका सामने आई है। मरीजों में उल्टी, सिरदर्द, शरीर का नीला पड़ना और अकड़न जैसे लक्षण बताए गए हैं।प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को सक्रिय कर दिया है। संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है और गंभीर मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और सागर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
शराब कहां से आई? जांच में जुटी पुलिस
एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक शुरुआती जांच में शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से होने की आशंका सामने आई है। पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और ललितपुर में भी संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।प्रशासन ने एहतियातन क्षेत्र की शराब दुकानों को सील कर उनके सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।घटना के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित गांवों में पहुंचे। अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपचार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने घटना को अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज और उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने की मांग की।सागर की यह घटना एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने खड़ा करती है कि आखिर अवैध और जहरीली शराब का कारोबार प्रशासन की निगरानी के बावजूद कैसे चलता रहता है?
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