SIR विवाद अब अदालत की चौखट पर, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाएं

SIR विवाद अब अदालत की चौखट पर, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाएं

नई दिल्ली। भारतभवः 

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर उठी आपत्तियों का मामला अब न्यायपालिका तक पहुंच गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से, अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड चांद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले, दिशा-निर्देश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलाव दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए। याचिका में इन फैसलों को असंवैधानिक घोषित करने और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।याचिका में SIT अथवा स्वतंत्र न्यायिक जांच के जरिए SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने मूल Form-6 को बहाल करने समेत कई अन्य राहतों की मांग की है।बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच में दाखिल याचिका में महाराष्ट्र में SIR से संबंधित आयोग की 14 प्रशासनिक कार्रवाइयों को चुनौती दी गई है। याचिका में कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसी मांगें की गई हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण

इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में जिन मतभेदों का उल्लेख किया गया है, वे आयोग की आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे और SIR से जुड़े अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।इसलिए फिलहाल मामला आरोपों और याचिकाओं से आगे बढ़कर न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गया है। अब अदालतें यह तय करेंगी कि याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर किस सीमा तक जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।

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