और 10 अरब डालर ने बचा लिया अडानी को

और 10 अरब डालर ने बचा लिया अडानी को

सत्ता से संरक्षित भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी अब अमेरिका में जेल जाने से बच गए हैं, हालांकि गौतम सर को इसकी बडी कीमत भी चुकाना पडी. उन्हे न भारत की सरकार बचा सकी और न कोईजादू-टोना. काम आया तो आखिर में ओंधे मुँह पडा भारतीय रुपया ही.ताजातरीन खबर है कि अमेरिका के न्याय विभाग ने गौतम अडानी पर लगे सभी आरोप न सिर्फ हटा लिए हैं बल्कि ऐसी व्यवस्था भी कर दी है कि कोई भी मामला भविष्य में खुलेगा भी नहीं. अडानी सर के खिलाफ न्यूयोर्क की अदालत में हाई सिक्योरिटीज और वायर धोखाधडी मामला चल रहा था. ये मामला बीते साल 2024 का है. लक्ष्मीपुत्र अडानी पर आरोप था कि अडानी समूह ने भारत में सोलर पावर का ठेका हासिल करने के लिए 26.05 करोड डालर की रिश्वत देने की पेशकश की थी. उन्होने अमेरिका के निवेशकों से भी ये बात छिपाई थी. अडानी की गिरफ्तारी के लिए अमेरिका न्याय विभाग समन पर समन भेजता रहा लेकिन वे तामील नहीं हुए, लेकिन जब अदालत ने सख्ती दिखाई तो अडानी ने फौरन पैतरा बदला. पहले भारत सरकार के प्रभाव का इस्तेमाल किया,बात नहीं बनी तो पांचवां वारंट ले लिया और वकीलों को अदालत में भेजकर समय रखने के लिए पक्ष मांग लिया. अडानी को पता था कि रिश्वत के आरोप प्रमाणित हो जाएंगे और उन्हे जेल जाना पडेगा. इसलिए लिए अदालत से मिले समय का उपयोग अमेरिका में सरकार से बातचीत के जरिये हल खोजने पर खर्च किया.
                                                    इधर अडानी ने अमेरिका में करीब 10 अरब डालर निवेश कर 15 हजार लोगों को नौकरियां देने का प्रस्ताव रखा उधर अमेरिका सरकार अडानी के खिलाफ मामले वापस लेने को तैयार हो गई. अब अभियोजकों ने अदालत में आवेदन लगाकर कहा है कि वे इन आपराधिक मामलों पर अपने संसाधन खर्च नहीं करना चाहते. अदालत ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए अडानी के खिलाफ दायर चार्जशीट को डिसमिस विद प्रिजुडिस कर दिया. अब ये मामला दोबारा नहीं खोला जा सकेगा.अडानी अगर मोदीजी के भरोसे बैठे रहते तो उन्हे जेल की हवा खाना ही पडती. अडानी ने जेल से ‘मुक्ति’ के साथ ‘मोक्ष’ पाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील राबर्ट गिऊफ्रा को ही अपना वकील बना लिया. पेशकश कर दी कि यदि उनके खिलाफ दायर चार्जशीट वापस ली जाती है तो वे अमेरिका में 10 अरब डालर का निवेश कर 15 हजार अमरीकियों को नौकरायां दे सकते हैं. कहते हैं कि ‘अंधा क्या चाहे, दो आंखें?’ अमेरिका सरकार ने आनन- फानन में अडानी का प्रस्ताव स्वीकार कर मुकदमे वापस ले लिए.अब असल परीक्षा मोदी सरकार की है जो दलदल में फंसी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आम जनता से साल भर तक सोना न खरीदने, विदेश न जाने, कम तेल खाने और कम तेल जलाने की अपील कर रही है. सरकार ने इस समय आम आदमी को अमेरिका जाने के समय अधिकतम 10 हजा डालर ले जाने की सीमा घटाकर 3 हजार डालर कर दी है. सवाल ये है कि इस आर्थिक आपातकाल मे मोदीजी की सरकार अपने प्रिय अडानी को अमेरिका में 10 अरब डालर का निवेश करने से रोक पाएंगे या सारे प्रतिबंध आमजन पर ही लागू करेंगे?
                                                    आपको बता दूं कि अडानी समूह अब केवल भारतीय कंपनी नहीं बल्कि तेजी से उभरता हुआ “ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क” बन चुका है.गौतम अडानी को आज सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में गिना जाता है.समूह का फैलाव बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली, हरित ऊर्जा, सीमेंट, गैस, डेटा सेंटर, मीडिया और लॉजिस्टिक्स तक है. अडानी की सूचीबद्ध कंपनियों के समूह का कुल मूल्य लगभग ₹20–22 लाख करोड़ के आसपास बैठता है. डॉलर में यह लगभग 230–260 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर माना जा सकता है।
अडानी समूह का कारोबार सीधे या साझेदारियों के जरिए लगभग 20 से अधिक देशों तक फैला माना जाता है।हालांकि समूह का मुख्य कारोबार भारत में है, लेकिन इसके पोर्ट, खनन, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट कई देशों में मौजूद हैं. आस्ट्रेलिया मे कोयला खनन और पोर्ट इजराइल में हाइफा पोर्ट,श्रीलंका में पोर्ट एंड विंड प्रोजेक्ट,इंडोनेशिया में कोल सप्लाई चेन के अलावा तंजानियांवियतनाम और फिलीपींस में भी पोर्ट गतिविधियों को फैला रखा है.
@ राकेश अचल

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