प्रधान के इस्तीफे के साथ ही आंदोलन समाप्त

प्रधान के इस्तीफे के साथ ही आंदोलन समाप्त

लगातार चले आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए इस्तीफे में तो पता नहीं उन्होंने क्या लिखा है लेकिन उन्होंने दो पन्नों की एक चिट्ठी ‘युवा साथियों’ के नाम जारी की है। इसमें उन्होंने कमियां स्वीकार करने की बजाय यह बताया है कि उन्होंने कितना अच्छा काम किया था। प्रधान ने लिखा है कि युवाओं के आंदोलन का कुछ लोग अपने लाभ के लिए गलत इस्तेमाल कर सकते थे इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया गया है।

दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने प्रधान के इस्तीफे को अपनी जीत बताया है। नीट यूजी पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पिछले 36 दिन से प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस्तीफे की खबर के बाद घुटनों के बल बैठ कर मंच पर हाथ पटका और कहा, ‘हमने कर दिखाया’। दीपके ने केंद्र सरकार को झुकाने का दावा करते हुए कहा, ‘वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’।गौरतलब है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 12 साल में पहली बार उनकी सरकार के किसी मंत्री को बाहरी दबाव में इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनिया भर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। महिला पत्रकारों ने आगे आकर उनके ऊपर इल्जाम लगाए थे, जिसके बाद उनका इस्तीफा हुआ था।

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