नई दिल्ली/कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके बाद आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। आयोग के फैसले के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम तथा ‘Envelope’ (लिफाफा) चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू होगी।
28 साल पुरानी पहचान पर अंतरिम रोक
चुनाव आयोग का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से पार्टी की राजनीतिक पहचान उसके नाम और ‘फूल-घास’ वाले चुनाव चिन्ह से जुड़ी रही है। आयोग ने कहा है कि दोनों गुट फिलहाल मूल नाम और चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनावों में दोनों गुटों को नई पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पार्टी का पारंपरिक चुनाव चिन्ह लंबे समय से उनके साथ रहा है और उन्होंने आयोग के फैसले के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है। फिलहाल यह अंतिम फैसला नहीं, बल्कि उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है। मूल पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम निर्णय आगे की प्रक्रिया में होना है। इसलिए आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और अदालत की कार्यवाही इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
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