केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने अचानक सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया। पुणे के काटोल में 23 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा कि अब वे ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। उनके इस बयान को कुछ लोगों ने राजनीति से दूरी या भविष्य में जिम्मेदारी छोड़ने के संकेत के तौर पर देखना शुरू कर दिया गडकरी ने कार्यक्रम में कहा था कि जब वे काम करने की स्थिति में थे तब उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार काम किया और अब जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपनी चाहिए। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इसके अलग.अलग मायने निकाले जाने लगे।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर गडकरी के कार्यालय की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि गडकरी का बयान राजनीतिक जिम्मेदारियों से जुड़ा नहीं था। वे लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट से जुड़े एक कार्यक्रम में सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपने की बात कर रहे थे।यानी जिस बयान को राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जाने लगा था गडकरी के कार्यालय ने उसे सामाजिक संस्था से जुड़े संदर्भ में बताया है।लेकिन इस घटनाक्रम ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है राजनीति में वरिष्ठ नेताओं के सामान्य बयानों को भी उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति आखिर इतनी तेज क्यों हो गई हैगडकरी लंबे समय से केंद्र की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनका नई पीढ़ी और ष्जिम्मेदारी सौंपने जैसा बयान स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बनना ही था। हालांकि उपलब्ध स्पष्टीकरण के मुताबिक फिलहाल इस बयान को उनकी राजनीतिक भूमिका से जोड़ना उचित नहीं होगा। गौरतलब है की बीते महीनो से गडकरी होल विवाद को लेकर खासे चर्चाओं में बने हुए हैं ।
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