गांधी जयंती के दिन दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर राजनीतिक टकराव का केंद्र बना। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के SIR को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली में 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा कि युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा—“लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।”
राहुल ने अपने बयान को महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के संदेश से जोड़ते हुए कहा कि सवाल पूछने की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि “ज्ञानेश कुमार जाएंगे और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वह भी जाएगा।” यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप और उनका सार्वजनिक बयान है; इसे तथ्य के रूप में नहीं, उनके राजनीतिक रुख के रूप में देखना चाहिए।इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विरोध केवल एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने प्रदर्शन किया, जबकि मुंबई में CJP के नेतृत्व में भी CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ।अब असली सवाल यही है—क्या चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से मिलेगा या फिर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट तथ्यों और पारदर्शी जवाबदेही से? यही सवाल आने वाले दिनों की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV?sub_confirmation=1
⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद ।

