सरकार से पूछा—आखिर जवाबदेही तय कब होगी?
नई दिल्ली। भारतभवः
दिल्ली में हुए हॉस्टल हादसे ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों पर तीखा हमला बोला है।राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों में हादसों के बाद कार्रवाई का एक तय पैटर्न दिखाई देता है। उनके मुताबिक, हादसे से पहले उसकी रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता और घटना के बाद बयानबाजी शुरू हो जाती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि किसी बड़ी घटना के बाद कुछ छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त करने की कोशिश की जाती है, जबकि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया ऊपर तक नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ किसी एक हादसे का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का है जो हादसा होने से पहले सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में विफल रहती है।
प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को अलग-अलग तरह के तमगे देकर बदनाम करने की कोशिश की जाती है। राहुल ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों का जिक्र किया और कहा कि सवाल उठाने वालों को चुप कराने के बजाय सरकार को सवालों के जवाब देने चाहिए।
दिल्ली हॉस्टल हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से क्या इंतजाम किए गए थे और सुरक्षा मानकों की निगरानी किस स्तर पर हुई।राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी या वास्तविक जवाबदेही भी तय होगी।
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