दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के तीन दिन निकल जाने के बावजूद भी प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं जबकि भाजपा से नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस से शोमा भारती का नाम लगभग तय है इसी से समझा जा सकता है कि इस उप चुनाव में बहुत दांव-पेंच होंगे भाजपा ने इसी दौरान 18 और 19 जुलाई को ओरछा में खंडेलवाल कार्यकाल की पहली कार्य समिति की बैठक आयोजित की है जिसमें भी दतिया विधानसभा का उपचुनाव केंद्र में रहेगा।
दरअसल प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा के उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है दतिया भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंथन चल रहा है क्योंकि प्रदेश में विधानसभा के आम चुनाव और इसके पहले नगरी निकाय और त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव होना है जिसके लिए माहौल बनाने के लिए यह उपचुनाव महत्वपूर्ण है वैसे तो यह सब चुनाव का महत्व उत्तर प्रदेश में होने जा रहे पंचायत और विधानसभा चुनाव को लेकर इस तरह से है जैसे पृथ्वीपुर विधानसभा के उपचुनाव को लेकर दोनों ही दल सजग और सावधान थे और उस समय भाजपा ने पूरी ताकत झोंककर उपचुनाव चुनाव जीत लिया था संगठन की ओर से मुकेश चौधरी और सरकार की ओर से तत्कालीन मंत्री गोपाल भार्गव ने चुनावी कमान संभाली थी क्योंकि दतिया उपचुनाव भी राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है और दतिया कभी भी एक तरफा भाजपा के पक्ष में
नहीं रही है। व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्याशी नरोत्तम मिश्रा साम दाम दंड भेद आजमाकर यह सीट जीतते रहे हैं जीत का अंतर भी कभी ज्यादा नहीं रहा और पिछले विधानसभा के आम चुनाव में जब भाजपा ने बहुमत से सरकार बनाई तब भारी यह सीट पार्टी हार गई और तब से ही खाते पार्टी और नरोत्तम मिश्रा इस सीट को वापस भाजपा के में लाने के लिए प्रयासरत रहे और कुछ ऐसी परिस्थितियों चन गई की ढाई साल बाद ही उपचुनाव की स्थिति दतिया वन गई है स्वयं नरोत्तम मिश्रा इस संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही लगातार क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े धार्मिक आयोजन के बहाने उन्होंने पूरे क्षेत्र के लोगों संपर्क साधा और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से भी क्षेत्रवासियों को मिलने का अवसर दिलाया अब जबकि 30 जुलाई को दतिया विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है उसके लिए 6 जुलाई को अधिसूचना जारी कर दी गई जिसके साथ ही नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। लेकिन 8 जुलाई की शाम तक दोनों ही दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं जबकि तय है कि भाजपा की ओर से नरोत्तम मिश्रा ही प्रत्याशी होंगे और कांग्रेस की ओर से सिंगल नाम राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती का दिल्ली भेजा गया है अब प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी दोनों ही दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व की है लेकिन जिस तरह से तू डाल-डाल में पात-पात की तर्ज पर प्रत्याशी चयन से ही भाजपा और कांग्रेस में प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है उससे सहज ही समझा जा सकता है कि यह उपचुनाव मध्य प्रदेश के अब तक के रोचक उपचुनाव में से एक हुआ बुंदेलखंड की सीमा जहां से शुरू होती है
समिति की बैठक 18 और 19 पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बहरहाल दतिया से लगभग 45 किलोमीटर दूर रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्य हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल जुलाई को होने जा रही है यह बैठक की पहली कार्य समिति की बैठक है दो दिवसीय इस बैठक में जहां विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी वहीं दतिया विधानसभा के उपचुनाव को लेकर महत्वपूर्ण रणनीति भी बनाई जाएगी क्योंकि पार्टी हर हाल में यह उपचुनाव जीतना चाहती है और विजयपुर विधानसभा के उपचुनाव की तरह किसी भी प्रकार के ओवर कॉन्फिडेंस में नहीं रहना चाहती जहां केबिनेट मंत्री के रूप में रामनिवास रावत को हर का सामना करना पड़ा था हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 106 सदस्य प्रदेश कार्य समिति एवं 41 स्थाई आमंत्रित सदस्यों की घोषणा की थी यह सभी इस कार्य समिति में बुलाए गए हैं और इन्हीं में से चुनाव जिताऊ नेताओं को सप्ताह के लिए दतिया में तैनात किया जाएगा फिलहाल पिछले कुछ महीनों से नरोत्तम मिश्रा अघोषित रूप से चुनाव जैसी ही जमावट करने में जुटे हुए हैं।उधर दूसरी और अचानक से दतिया विधानसभा के उपचुनाव की घोषणा हो जाने के बाद कांग्रेस भौचक्की सी रह गई और चुनाव घोषित होते ही आनन-फानन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह वह कार्यकर्ता सम्मेलन में में भाग लेने दतिया पहुंच गए जहां उन्होंने दतिया ही है जो मां पीतांबरा का सिद्ध स्थान है माता धूमावती जहां विराजी हुई है यह क्षेत्र जुलाई का अंतिम पखवाड़ा राजनीति का प्रमुख अखाड़ा होगा। दतिया के जीत का संकल्प कार्यकर्ताओं को दिलाया लेकिन पार्टी अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है।
सूत्रों की माने तो पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती का सिंगल नाम प्रदेश नेतृत्व की की ओर से दिल्ली गया है जहां पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व फैसला लेगा इसके पहले राजेंद्रभारती के बेटे अनुज भारती पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक और सेवड़ा से पूर्व विधायक रहे घनश्याम सिंह का नाम की चर्चाओं में था लेकिन पार्टी की रणनीति सहानुभूति वोट बटोरने की बन रही है और उसी के तहत शोभा भारती का नाम सबसे आगे है हालांकि राजेंद्र भारती ने यह कहकर चौंका दिया कि उन्होंने पार्टी हाई कमान से आग्रह किया है यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बना दे उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी जिस भी उम्मीदवार को मैदान में उतरेगी वह उसके समर्थन में पूरी ताकत से चुनाव प्रचार करेंगे। कुल मिलाकर मजबूत संगठन प्रदेश में सरकार और दमदार प्रत्याशी होने के बावजूद भाजपा दतिया विधानसभा के उपचुनाव को लेकर गंभीर है क्योंकि आंकड़े बता रहे हैं कि 2008 से 2023 तक के विधानसभा के चुनाव का आकलन करें तो जितनी तेजी से कांग्रेस का वोट प्रतिशत बड़ा है उसे गति से भाजपा का नहीं बढ़ पाया है और 2023 के विधानसभा के आम चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से लगभग चार फ़ीसदी वोट ज्यादा मिल गए और जिसके परिणाम स्वरूप भाजपा प्रत्याशी तत्कालीन मंत्री नरोत्तम मिश्रा दतियासे चुनाव हार गए थे। इसी कारण नरोत्तम मिश्रा और पार्टी इस चुनाव को लेकर गंभीर है जबकि विपक्षी दल कांग्रेस भी पूरी ताकत लगाकर दतिया सीट को भाजपा के खाते में जाने से रोकने लिए जोर लगा रही है नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि जुलाई है और उम्मीद की जा रही है कि आज कल में दोनों प्रमुख दल दल अपने प्रत्याशी घोषित कर देंगे।
@ देवदत्त दुबे
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