सम्पादकीय

ओरछा से भाजपा संदेश – अब पुराने भरोसे के साथ होगी ‘नई पीढ़ी’ की साधना

मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक इस बार सिर्फ संगठनात्मक औपचारिकता नहीं रही। रामराजा सरकार की नगरी ओरछा में हुई दो दिवसीय बैठक ने पार्टी की आने वाली राजनीतिक दिशा के कई संकेत दिए हैं। करीब 350 से अधिक नेताओं की मौजूदगी वाली इस बैठक में मिशन-2028, बूथ सशक्तीकरण, युवा मतदाताओं तक पहुंच और बुंदेलखंड के विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश दो घटनाओं के बाद भाजपा के आत्ममंथन में दिखाई देता है—Gen-Z और युवा मतदाताओं के बीच बदलती राजनीतिक भाषा तथा दतिया उपचुनाव का झटका।

                        भाजपा लंबे समय से युवाओं को अपने साथ जोड़ने की राजनीति करती रही है। लेकिन Gen-Z का राजनीतिक व्यवहार पारंपरिक युवा राजनीति से अलग है। यह पीढ़ी भाषणों से ज्यादा सोशल मीडिया, वीडियो, मीम, डिजिटल संवाद और तत्काल जवाबदेही को महत्व देती है। जंतर मंतर  पर  हुए  हालिया छात्र आंदोलन और उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने इस बहस को और तेज कर दिया।  नीट विवाद को लेकर चले आंदोलन के बीच प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया और सरकार ने आंदोलन से जुड़ी कुछ मांगों पर कदम भी उठाए।इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। असली संदेश यह है कि नई पीढ़ी सवाल पूछ रही है और सत्ता से जवाब मांग रही है। यही वजह है कि ओरछा की कार्यसमिति में Gen-Z को लेकर विशेष रणनीति चर्चा में आई। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा अब युवाओं तक पहुंचने के लिए पारंपरिक भाषणों के साथ Instagram Reels, YouTube Shorts और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर ज्यादा जोर देने की तैयारी में है।

                         दूसरा बड़ा सबक दतिया उपचुनाव से मिला।भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। टिकट की घोषणा के बाद दतिया में विरोध हुआ, पार्टी पदाधिकारियों के इस्तीफे हुए और समर्थक सड़कों पर उतरे  इसके बाद भाजपा को चुनावी हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद पार्टी ने समीक्षा समिति बनाई और अगस्त में दतिया का जिला संगठन भी भंग कर दिया। यहां सवाल सिर्फ यह नहीं है कि टिकट किसे मिला और कौन हारा। बड़ा सवाल यह है कि क्या संगठन और जमीन के बीच संवाद कमजोर पड़ गया था? राजनीति में पीढ़ी परिवर्तन जरूरी है, लेकिन पीढ़ी परिवर्तन का अर्थ पुराने चेहरों और उनके समर्थक नेटवर्क को अचानक अप्रासंगिक मान लेना नहीं हो सकता।

भाजपा का नया फार्मूला: युवा आगे, वरिष्ठ साथ 

 ओरछा की बैठक से जो सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत निकलता है, वह है—नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना, लेकिन वरिष्ठों को साथ लेकर।यह संतुलन भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी अब मिशन-2028 की तैयारी में जुट चुकी है। बैठक में संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।युवा मतदाता भाजपा के लिए सिर्फ संख्या नहीं हैं। वे राजनीतिक विमर्श की दिशा भी बदल रहे हैं। रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, महंगाई, डिजिटल अवसर और पारदर्शिता जैसे मुद्दे उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इसलिए भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं को कार्यक्रमों में बुलाने की नहीं है। चुनौती है—उनकी भाषा समझने की क्योकि स्वभाव से युवाओं की आंधी समस्याओं के लिये सत्तापक्ष को ही दोषी मानती है जिसका सीधा लाभ विपक्ष को मिलता है   ओरछा में बैठक का आयोजन अपने आप में राजनीतिक संदेश है। बुंदेलखंड भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इसलिए यहां संगठन को मजबूत रखना पार्टी की प्राथमिकताओं में स्वाभाविक रूप से शामिल है। बैठक में बुंदेलखंड के विकास, किसान, रोजगार, उद्योग और केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसे मुद्दों को भी राजनीतिक प्रस्ताव में प्रमुखता दी गई।

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