सागर। राजनीति में कुछ परिवार ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल चुनाव जीतने या सत्ता के गलियारों तक पहुंचने से नहीं बनती बल्कि उनके पीछे वर्षों का संघर्ष संगठन के प्रति समर्पण और विचारधारा के लिए किए गए त्याग की लंबी कहानी होती है। सागर की राजनीति में राठौर परिवार भी ऐसी ही एक पहचान रखता है जिसने बुंदेलखंड में भाजपा संगठन की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। अब इस राजनीतिक विरासत की एक नई कड़ी जुड़ने जा रही है। जसवंत सिंह राठौर का नाम भाजपा युवा मोर्चा के सागर जिलाध्यक्ष पद के लिए तय किया गया है यह नियुक्ति केवल एक युवा चेहरे को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने भर का मामला नहीं है बल्कि उस राजनीतिक विरासत के आगे बढ़ने का अवसर भी है जिसकी नींव जनसंघ के दौर में रखी गई थी।
सागर में जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के विस्तार की कहानी में स्वर्गीय पूर्व मंत्री हरनाम सिंह राठौर का नाम महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने उस दौर में संगठन को खड़ा करने के लिए राजनीतिक संघर्ष के साथ आर्थिक और संगठनात्मक स्तर पर भी योगदान दिया जब आज की तरह संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं विशेषकर सत्ता के लिये संघर्ष कर रही साधन विहीन भाजपा के शुरूआती दौर में हरनाम सिंह राठौर की पहचान एक कुशल संगठनकर्ता और मजबूत राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में बनी। उनके लिए राजनीति केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि संगठन और विचारधारा को मजबूत करने का रास्ता थी।यही वजह रही कि राठौर परिवार की पहचान केवल एक राजनीतिक परिवार तक सीमित नहीं रही बल्कि सागर में भाजपा की संगठनात्मक यात्रा का हिस्सा बन गई।
हरनाम सिंह राठौर के बाद पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हरवंश सिंह राठौर ने इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक आधार को नई परिस्थितियों में आगे ले जाने का काम किया तो कुलदीप राठौर ने जनसंपर्क और मददगार वाली छवि को बरकरार रखा । समय बदला, राजनीति के समीकरण बदले, चुनावी रणनीतियां बदलीं लेकिन राठौर परिवार की संगठनात्मक पहचान बनी रही। 2018 में बंडा विधानसभा चुनाव हारने , जिला भाजपा संगठन में अहम भूमिका में न होने के बाद भी राठौर परिवार का विचारधारा पर विश्वास बना रहा ।अब इसी परिवार की चौथी पीढ़ी से जसवंत सिंह राठौर को भाजपा युवा मोर्चा के सागर जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। यह अवसर जितना महत्वपूर्ण है उतनी ही बड़ी चुनौती भी क्योंकि आज की राजनीति पुरानी पीढ़ी के दौर से काफी अलग है आज का युवा केवल राजनीतिक भाषणों से प्रभावित नहीं होता वह नेतृत्व में संवाद, पारदर्शिता, अवसर और परिणाम देखना चाहता है।
जेन जी के दौर में सोशल मीडिया डिजिटल संवाद रोजगार शिक्षा और युवाओं की भागीदारी राजनीति के नए मुद्दे बन चुके हैं। ऐसे में जसवंत सिंह राठौर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार की विरासत को दोहराने की नहीं बल्कि उसे नई पीढ़ी की अपेक्षाओं के अनुरूप विकसित करने की होगी।राजनीति में विरासत किसी के लिए शुरुआत का रास्ता जरूर आसान कर सकती है लेकिन लंबे समय तक नेतृत्व की स्वीकार्यता उसके अपने काम से ही बनती है। जसवंत के सामने भी यही कसौटी होगी उन्हें यह साबित करना होगा कि वे केवल एक स्थापित राजनीतिक परिवार के उत्तराधिकारी नहीं बल्कि युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान और नेतृत्व क्षमता रखने वाले संगठनकर्ता भी हैं।भाजपा के लिए भी यह नियुक्ति एक अवसर है एक ओर पार्टी अपने पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ताओं और परिवारों की विरासत को सम्मान दे रही है वहीं दूसरी ओर युवा नेतृत्व को आगे लाने का संदेश भी दे रही है सागर की राजनीति में राठौर परिवार की कहानी का यह नया अध्याय केवल एक नियुक्ति नहीं बल्कि विरासत से नेतृत्व और नेतृत्व से नई पहचान बनाने की अग्निपरीक्षा भी है।
https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV?sub_confirmation=1
⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद ।
बनासकांठा के किसान पहले ही आलू से सोना बना रहे हैं - मोदी गुजरात दौरे…
सीहोर में लाड़ली बहना की गुहार पर मंत्री करण सिंह वर्मा का जवाब चर्चा में,…
डिजिटल लेन-देन की सुविधा कहीं आम आदमी के लिए आर्थिक मुसीबत तो नहीं बनती जा…
नई दिल्ली। भारतभवः देश के प्रमुख औद्योगिक समूह टाटा को लेकर अब सियासत तेज हो…
शिवपुरी/करैरा। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री…
भोपाल। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी…