मुंबई पुलिस का दावा—हत्या के इरादे से की गई थी फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कनेक्शन की जांच
फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हमले के बाद फरार हुए तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया गया। पुलिस के मुताबिक, वारदात के करीब 15 घंटे के भीतर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली। शुरुआती जांच में मामला सुनियोजित हमले का प्रतीत हो रहा है।मुंबई पुलिस ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि फायरिंग का तरीका देखकर ऐसा लगता है कि हमलावर हत्या के इरादे से आए थे। पुलिस के अनुसार, इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया गया है कि अनिल पंडित ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक वीडियो जारी किया था। इन दावों की जांच के बीच पुलिस हमले के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने में जुटी है।
पुणे से जयपुर जा रही ट्रेन में मिले संदिग्ध
पुलिस के अनुसार, हमले के बाद तीनों संदिग्ध मुंबई से निकलकर जयपुर और दिल्ली के रास्ते नेपाल भागने की तैयारी में थे। इसी दौरान मुंबई पुलिस से मिली सूचना पर कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई और सुबह करीब 10:30 बजे पुणे से जयपुर जा रही ट्रेन के जनरल कोच से तीनों को हिरासत में ले लिया। बताया गया है कि संदिग्ध बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।पकड़े गए संदिग्धों में हरियाणा के सोनीपत का रेहान और बिहार के बेगूसराय का ऋतिक कुमार उर्फ रोशन शामिल बताए गए हैं। तीसरे संदिग्ध की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी की पुष्टि पुलिस की जांच के आधार पर की जानी है।
टाइगर श्रॉफ और ड्राइवर भी घायल
फायरिंग की घटना में टाइगर श्रॉफ को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके बाएं हाथ में बारूद और कांच के टुकड़ों से चोट आई। गोलीबारी में उनका ड्राइवर भी घायल हुआ। घटना के बाद से ही मुंबई पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी थी।पुलिस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध पिछले करीब दस दिनों से टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो इससे हमले की पूर्व नियोजित प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़े सवाल
तीनों संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा अब हमले के पीछे की साजिश, कथित सुपारी, हथियारों की व्यवस्था और अन्य संभावित सहयोगियों तक पहुंचने पर केंद्रित है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि हमले की योजना किसने बनाई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।फिलहाल, पुलिस के दावों और आरोपियों के खिलाफ सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है; जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
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