चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल
भोपाल/शाजापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शाजापुर में प्रेस वार्ता के दौरान हिंदुत्व, सनातन धर्म, संविधान और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीति पर तीखा हमला बोला।दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि वे न कभी हिंदुत्व के समर्थक रहे हैं और न आगे रहेंगे। उनके मुताबिक, हिंदुत्व और सनातन धर्म को एक मानना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म हजारों साल पुरानी परंपरा है, जबकि हिंदुत्व शब्द का राजनीतिक संदर्भ विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा है। सिंह ने कहा कि सनातन धर्म में कटुता और नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।
संविधान और नागरिकता पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देना संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उनके अनुसार, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में नागरिकता और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों पर संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए नोट चोरी और वोट चोरी के मामलों को उठाया तथा इन मामलों में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल खड़े किए।सिंह के इन बयानों ने एक बार फिर राजनीतिक विमर्श में धर्म, संविधान और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। उनके आरोपों और दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

