त्विषा शर्मा केस – ऊंट का पहाड़ के नीचे आना

त्विषा शर्मा केस – ऊंट का पहाड़ के नीचे आना

भारतीय मुहावरे और कहावतें मुझे सिर्फ इसीलिए पसंद हैं क्योंकि वे सटीक भी लगती हैं और प्रामाणिक भी. भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा हत्याकांड में न्यायिक सेवा से निवृत्त श्रीमती गिरिबाला की गिरफ्तारी ने ये प्रमाणित कर दिया कि ‘ऊंट पहाड़ के नीचे कैसे आता है?सीबीआई ने शुक्रवार को त्विषा शर्मा मौत मामले में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया. अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया.गिरिबाला ने तीन दशक से ज्यादा समय न्याय की कुरसी पर बैठकर जो काम किया आज उसी प्रक्रिया का सामना उन्हे करना पड रहा है. गिरिबाला ने स्वप्न में भी कल्पना नहीं कि होगी कि चौथेपन में वे गिरफ्तार होकर किसी इजलास में एक मुजरिम की तरह पेश की जाएंगी.आपको बता दूं कि गिरिबाला को अपनी बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है.33 वर्षीय त्विषा शर्मा का शव 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में मिला था.त्विषा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी.त्विषा के परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं.परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही त्विषा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था.मामले की शुरुआती जांच भोपाल पुलिस ने की थी. बाद में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया.जनता का दबाब बढा तो इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया और सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू की.
                            इस मामले मे अदालत ने जांच एजेंसी की उस दलील को स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि मामले की कई कड़ियों की जांच अभी बाकी है और अभियुक्तों को एक साथ बैठाकर पूछताछ की ज़रूरत है.
इसके पहले त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ़्तार कर पुलिस रिमांड पर भेजा गया था. बाद में मध्य प्रदेश सरकार के मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में दिया गया था.
खास बात ये कि गिरिबाला की जमानत का मामला भी एक महिला जज के इजलास में पेशश किया गया. भोपाल में जस्टिस शोभना भलावे की अदालत ने उनकी सीबीआई रिमांड पांच दिन के लिए और बढ़ा दी. इसी आदेश के तहत गिरिबाला सिंह को भी पांच दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया है.त्विषा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे के मुताबिक , “सीबीआई ने अदालत से दोनों आरोपियों की पांच पांच दिन की रिमांड मांगी थी.”सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है, दोनों आरोपी प्रभावशाली हैं और घटना से जुड़े कई पहलुओं की जांच शुरू से की जानी है.”गिरिबाला सिंह ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश रही हैं. वे इस मामले में पिछले एक पखवाडे से अपने रसूख की वजह से गिरफ्तारी से बच रहीं थीं.लेकिन 28 मई को सीबीआई ने त्विषा शर्मा की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार किया था.गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने “भोपाल स्थित घर में कई घंटे तक पूछताछ और जांच की थी.गिरफ्तारी से एक दिन पहले ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत रद्द कर दी थी.अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध सामग्री और जांच की स्थिति को देखते हुए उन्हें राहत देना उचित नहीं था12 मई को त्विषा शर्मा की मौत के बाद अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं.ऐसे में यह देखना बाकी है कि सीबीआई त्विषा की संदिग्ध मौत की सच्चाई तक पहुंचती है या नहीं? फिलहाल ये तो तय हो गया है कि ऊंट कितना भी बडा हो पहाड से बडा नहीं हो सकता.काश ऐसी ही सघनता देश में हर रोज दहेज़ की बेदी पर मरने वाली हर त्विषा के मामले में बरती जा सकती.
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श्री राकेश अचल  ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश  

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