रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन , ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग

रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन , ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग

नई दिल्ली। भारतभवः  

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की रैली ने देश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज कर दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग उठाई। रैली में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के जरिए जनादेश को प्रभावित किया गया है। विपक्षी नेताओं के भाषणों में एक बात समान रही—चुनाव आयोग की जवाबदेही और कथित वोट चोरी के आरोप। कई नेताओं ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को अपने कथित कृत्यों का जवाब देना होगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध तथ्यों से नहीं होती।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, अधिकार और चुनावी मतगणना को लूटा गया है। ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल में उन्हें हराया नहीं गया, बल्कि हराने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, “हम छोड़ेंगे नहीं, जिंदगी देंगे, हम लड़ेंगे। हमारा बंगाल लूट लिया गया। हम लोकतंत्र बचाएंगे।” ममता ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केवल वोट ही नहीं, बल्कि पूरी काउंटिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उनके भाषण में बंगाल का राजनीतिक संघर्ष और चुनावी नतीजों को लेकर नाराजगी प्रमुखता से दिखाई दी।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश की राजनीति को केंद्र में रखा। उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी उत्तर प्रदेश से आए थे, उन्हें एक दिन यहीं से विदाई भी मिलेगी।अखिलेश ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए भाजपा की विदाई का दावा किया। उन्होंने रामलीला मैदान का संदर्भ लेते हुए कहा कि पाप करने वालों का अंत निश्चित है।राम मंदिर से जुड़े चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश ने भाजपा पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने चंदा और चढ़ावा चोरी किया है, उनका सर्वनाश होगा।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में महाभारत का सहारा लेकर चुनावी राजनीति पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में इस बार वोट चोरी के आरोपों को लेकर महाभारत जैसा संघर्ष हो रहा है। तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तुलना महाभारत के पात्र शकुनि से करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने अपने संबोधन में इसे लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को कथित फासीवादी ताकतों से बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।

रामलीला मैदान की इस रैली का राजनीतिक महत्व केवल इसलिए नहीं है कि इसमें विपक्ष के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए, बल्कि इसलिए भी है कि सभी नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका को अपने हमले का प्रमुख आधार बनाया।राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव तक के भाषणों में भले ही मुद्दे और राजनीतिक संदर्भ अलग-अलग रहे हों, लेकिन निशाना एक ही था—चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही।

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