जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा  –  खेत बना नकली शराब की फैक्ट्री

जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा – खेत बना नकली शराब की फैक्ट्री

बंडा | सागर

बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अवैध शराब के कारोबार का नेटवर्क भी सामने आता जा रहा है। सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बंडा में प्रेस वार्ता कर अब तक की कार्रवाई और जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक मामले में नामजद 33 आरोपियों में से 16 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

खेत में तैयार हो रही थी नकली शराब

पुलिस की जांच में सामने आया कि ततरवारा गांव के सरपंच चंद्रभान उर्फ चंदू राजपूत के खेत से नकली शराब बनाने और पैकिंग से जुड़ा सामान बरामद हुआ। यहां से 164 क्वार्टर सागर गोल्ड प्लेन मदिरा और 27 लीटर अमानक शराब मिली। पुलिस का दावा है कि 2 सितंबर को मक्का के खेत में करीब 50 पेटी नकली शराब तैयार की गई थी। इसे ‘सागर गोल्ड’ के नाम से पैक कर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सेल्समैन के माध्यम से पहुंचाया गया। जांच के दौरान बरेठी शराब दुकान के लाइसेंसी ठेकेदार मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर की भूमिका सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार मनीष लोधी अंतरराज्यीय शराब तस्कर रवि लखेरा के संपर्क में था। पुलिस का आरोप है कि रवि लखेरा से अवैध शराब तैयार करने का तरीका और फार्मूला मिलने के बाद नकली शराब का निर्माण किया गया।

पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे मनीष लोधी और रवि लखेरा पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। वहीं अन्य 15 फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

252 लीटर से ज्यादा शराब जब्त

पुलिस के अनुसार बंडा और विनायका थानों में दर्ज दो अलग-अलग मामलों में अब तक 252.12 लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है। पूछताछ में शराब बनाने, उसकी पैकिंग और ग्रामीण इलाकों तक सप्लाई पहुंचाने के नेटवर्क से जुड़ी जानकारियां मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक अंतरराज्यीय शराब तस्कर रवि लखेरा पर करीब 25 मामले, चंद्रभान उर्फ चंदू राजपूत पर 5 मामले और मनीष लोधी पर 11 मामले दर्ज हैं। इनमें मनीष के छह मामले शराब तस्करी से संबंधित बताए गए हैं।

बड़ा सवाल—कितना बड़ा था नकली शराब का नेटवर्क?

बंडा मामले में पुलिस की अब तक की जांच ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेत में नकली शराब का निर्माण, उसकी पैकिंग और फिर ग्रामीण इलाकों तक सप्लाई—ये संकेत एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना और यह पता लगाना है कि नकली शराब कहां से तैयार हुई, कितने लोगों तक पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

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