जल गंगा संवर्धन अभियान बना जनआंदोलन ’जल संरक्षण केवल अभियान नहीं, आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है
— मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत
लक्ष्य से 261 प्रतिशत अधिक उपलब्धि पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ को दी बधाई
अभियान समाप्त हुआ है, लेकिन पानी बचाने का कार्य कभी समाप्त नहीं होता, हम अपनी जिम्मेदारी निभाते रहें
– कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत सोमवार को सुरखी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गुरैया में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री श्री राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन है। जिले में तालाबों, कुओं, बावड़ियों एवं अन्य जल स्रोतों के संरक्षण, साफ-सफाई, गहरीकरण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण तथा जनजागरूकता जैसे कार्य बड़े पैमाने पर किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
इस अवसर पर उन्होंने जिले में अभियान के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 34,703 कार्यों के विरुद्ध 90,685 कार्यों का सफल क्रियान्वयन कर 261 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि लक्ष्य से 261 प्रतिशत अधिक उपलब्धि प्राप्त करना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। इसके लिए उन्होंने कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर परिषद एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों, विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवाओं तथा आम नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से यह अभियान एक जनआंदोलन का स्वरूप ले सका है।
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जल संरक्षण का कार्य किसी एक दिन या एक अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को अपने घर, खेत, गांव और शहर में जल की प्रत्येक बूंद का सम्मान करते हुए वर्षा जल संचयन अपनाना, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखना चाहिए। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से आह्वान किया कि जल है तो कल है के संकल्प को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और जल संरक्षण को निरंतर जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल संसाधन सुरक्षित रह सकें।
’एक पेड़ माँ के नाम लगाने की अपील’
पर्यावरण को बचाने का संदेश देते हुए मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों को जीवित रखना भी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हर व्यक्ति से एक पेड़ माँ के नाम अनिवार्य रूप से लगाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश वाचन किया और क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। निटर्री से अगरा मार्ग के लिए ₹4 करोड़ की लागत से रोड मंजूर की गई है, जिससे अब लंबे रास्ते और घूमकर जाने की मजबूरी खत्म होगी।, शासकीय हाई स्कूल के लिए ₹20 लाख की राशि और स्कूल भवन मरम्मत के लिए ₹5 लाख स्वीकृत किए गए हैं। गाँव में शादियों और मांगलिक कार्यों के लिए ₹25 लाख की लागत से मंगल भवन के निर्माण की घोषणा की गई।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में जल संरक्षण की दिशा में हुए कार्यों के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही इस अभियान का औपचारिक समापन हो रहा है, परंतु पानी बचाने और जल स्रोतों को सहेजने का हमारा कर्तव्य कभी समाप्त नहीं होता।
’विभिन्न विभागों के समन्वय से बदली ग्राम पंचायतों की तस्वीर’
कलेक्टर ने बताया कि पानी रोकने का यह महाअभियान मुख्य रूप से मार्च से जून तक निरंतर चलाया गया, जिसके तहत मनरेगा के माध्यम से 8.5 हजार से ज्यादा कार्य सफलतापूर्वक किए गए हैं। इस अभियान में विभिन्न विभागों ने मिलकर सामूहिक प्रयास किए हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत गुरैया के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यहाँ जल संरचना के तहत अमृत सरोवर का बहुत अच्छा निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण एवं संवर्धन के अतिरिक्त अन्य विभागों के समन्वित प्रयास भी रंग लाए हैं। कृषि विभाग द्वारा बलराम तालाब और उद्यानिकी विभाग द्वारा माइक्रो इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) को बढ़ावा दिया गया है ताकि ऐसी खेती की जा सके जिसमें पानी कम लगे। वन विभाग द्वारा कंटूर ट्रेंच बनाकर जंगली क्षेत्रों में वर्षा के पानी को रोकने का सराहनीय कार्य किया गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा वॉटर सैंपलिंग का कार्य किया गया। इसी प्रकार हैंडपंपों के पास जल संचयन के लिए सोक पिट बनाए गए हैं।
’महाराष्ट्र के गाँव का दिया उदाहरण’
अपने संबोधन में कलेक्टर ने 1970-80 के दशक में पानी की भारी समस्या से जूझने वाले महाराष्ट्र के 235 परिवारों के हिवारे बाजार गाँव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उस गाँव ने चेक डैम, स्टॉप डैम, बोरी बंधान और कंटूर ट्रेंच जैसी जल संरचनाओं को अपनाकर अपनी किस्मत बदली और जल आत्मनिर्भर बना।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सभी ग्राम पंचायतों को प्रेरित करते हुए निर्देश दिए कि अभियान खत्म होने के बाद भी ग्राम पंचायतें लगातार कार्य करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर अपनी-अपनी पंचायतों में कोई न कोई ऐसा कार्य अवश्य करना है, जिससे हमारे गाँव का भू-जल स्तर बढ़े और आने वाली पीढ़ियों को पानी के संकट से न जूझना पड़े। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक केवी, महिला बाल विकास अधिकारी श्री भरत सिंह राजपूत सहित, अनु जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।
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