क्या इंडिया गठबंधन अब राहुल गांधी को आगे अपना नेता मानने के मूड में नहीं है यह सवाल इसलिये उठता है क्योकि विधानसभा उपचुनावों के नतीजे आने के बाद संसद के शीत सत्र में विपक्षी एकता कमजोर ही नजर आई । अडानी मामले पर कांग्रेस का साथ न तो तृणमूल कांग्रेस ने दिया और न समाजवादी पार्टी ने। समाजवादी पार्टी के नेता ने तो यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी कांग्रेस के नेता हैं हमारे नेता नहीं।हाल के घटनाक्रम से इस बात के संकेत साफ मिल रहे हैं कि विपक्षी घटक दल राहुल के नेतृत्व में आगे का सफर तय करने के लिए तैयार नहीं है । बहुत से घटक दलों के लिए जिस आक्रामकता की दरकार विपक्ष को है वो तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी में दिखाई दे रही है। एनसीपी के शरद पंवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले भी ममता के नेतृत्व को स्वीकार करने के मूड में नजर आ रहे है। महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में राहुल के साथ मिलाकर चुनाव लड़ी एनसीपी चुनाव नतीजों से नाखुश है। नाखुश तो शिव सेना .उद्धव गुट भी है। आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के सुर पहले से ही बदले .बदले सुनाई दे रहे हैं।
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