देश में परीक्षा, पेपर लीक, महंगाई, एसआईआर और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उठ रही अलग-अलग आवाजों को एक मंच पर लाने के लिए राहुल गांधी ने ‘सत्याग्रह’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।राहुल गांधी का कहना है कि देश में छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएं और युवा अपने-अपने स्तर पर अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज अक्सर अकेली पड़ जाती है। इसी वजह से उन्होंने लोगों से अपनी संघर्ष की कहानी साझा करने की अपील की है।राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के उस तरीके का संदर्भ दिया, जिसमें आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को एकत्र कर उन्हें व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनाया जाता था।अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि राहुल गांधी का यह अभियान कितना सफल होगा। बड़ा सवाल यह है कि क्या बिखरी हुई नाराजगी को एक साझा राजनीतिक आंदोलन में बदला जा सकता है?अगर ऐसा हुआ, तो यह पहल संसद की राजनीति से निकलकर सड़क की राजनीति का नया अध्याय बन सकती है।
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