ब्रिक्स का नया एजेंडा: अगले 20 साल की दिशा तय करने की पहल

ब्रिक्स का नया एजेंडा: अगले 20 साल की दिशा तय करने की पहल

ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की बदलती तस्वीर के बीच विकासशील देशों की भूमिका को और मजबूत करने का संदेश दिया। सम्मेलन की मेजबानी करते हुए मोदी ने कहा कि अब केवल मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अगले 20 वर्षों की वैश्विक रणनीति पर मिलकर काम करने की जरूरत है।प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के सामने अगले दो दशकों का साझा एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लिए गए फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए एक ऐसी स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए, जो दीर्घकालिक योजनाओं की निरंतर निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सके।

AI से अंतरिक्ष तक—नियम बनाने में विकासशील देशों की आवाज

मोदी ने भविष्य की तकनीकों को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों के लिए दुनिया में जो नियम बनेंगे, उनमें विकासशील देशों की भी बराबर भागीदारी होनी चाहिए।

उनका संदेश साफ था—तकनीक का भविष्य कुछ चुनिंदा शक्तिशाली देशों के हाथों में सीमित नहीं रह सकता। जिन देशों की आबादी और युवा शक्ति दुनिया के भविष्य को प्रभावित करती है, उनकी आवाज भी वैश्विक नियम तय करने की प्रक्रिया में शामिल होनी चाहिए।प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को बातचीत तथा कानून से जुड़ी ट्रेनिंग देने का सुझाव भी रखा। यह प्रस्ताव इस सोच को दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और कूटनीति को नई पीढ़ी के नेतृत्व की जरूरत होगी।मोदी ने मानवीय सहयोग का एक उदाहरण भी सामने रखा। उन्होंने संकट में फंसे नाविकों को चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सदस्य देशों के बीच एक साझा नेटवर्क बनाने की बात कही।

मोदी का संदेश—भविष्य किसी एक देश का नहीं

ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री का मूल संदेश वैश्विक साझेदारी के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।यही इस सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर भी है—ब्रिक्स को केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की सामूहिक आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश।

                           अगले 20 वर्षों का एजेंडा बनाने का प्रस्ताव दरअसल आने वाली दुनिया में भारत और अन्य विकासशील देशों की भूमिका को पहले से तय करने की कोशिश है। असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि सम्मेलन में बने विचार और प्रस्ताव कितनी तेजी से वास्तविक नीतियों और साझा कार्रवाई में बदलते हैं।

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