आजादी के बाद से ही भारत में लोकतंत्र की उम्र और मजबूती को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही है । लेकिन हर काल में जब जब यह संसय गहराता हुआ सा लगता है तभी कोई अप्रत्याशित घटना भारत के महान लोकतंत्र की मजबूत नीव का अहसास करा देती है । आज पश्चिम बंगाल की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में एक चेहरा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना। यह चेहरा किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं था, न ही किसी उद्योगपति या प्रभावशाली घराने से जुड़ा था। यह एक ऐसी महिला का चेहरा था, जिसने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा लोगों के घरों में बर्तन मांजने और घरेलू काम करके परिवार का पालन-पोषण करने में बिताया। आज वही महिला राज्य सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री के रूप में शपथ ले रही है।यह घटना केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस शक्ति का प्रतीक है, जिसमें साधारण से साधारण व्यक्ति भी सत्ता के सर्वोच्च गलियारों तक पहुंच सकता है।गरीबी और अभाव में जीवन बिताने वाले लाखों भारतीयों की तरह इस महिला का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक कठिनाइयों के बीच परिवार का भरण-पोषण करना, समाज की उपेक्षा झेलना और सीमित संसाधनों में जीवन गुजारना उसकी रोजमर्रा की हकीकत थी। लेकिन राजनीति में सक्रियता, समाज के बीच लगातार काम और जनता से जुड़ाव ने उसे एक नई पहचान दी। भाजपा ने उसके संघर्ष और जनसंपर्क को पहचानते हुए विधानसभा का टिकट दिया। जनता ने उस पर विश्वास जताया और आज वह मंत्री पद तक पहुंच गई बस यही तो लोकतंत्र का चमत्कार है जो इस पर आस्था को और अधिक मजबूत बनता है ।
भारतीय राजनीति पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि सत्ता कुछ परिवारों या विशेष वर्गों तक सीमित हो गई है। ऐसे समय में किसी घरेलू कामगार महिला का मंत्री बनना इस धारणा को चुनौती देता है।यह संदेश भी जाता है कि लोकतंत्र केवल अभिजात वर्ग का मंच नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए अवसरों का द्वार भी है उन सपनो का सच होना है जिसकी उम्मीद करना भी बेमानी सी लगती है । राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह भाजपा का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी है। पार्टी लंबे समय से यह दावा करती रही है कि वह समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा की राजनीति में स्थान देना चाहती है। एक साधारण महिला को न केवल टिकट देना बल्कि मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपना इस रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। इससे पार्टी गरीब, महिला और वंचित वर्गों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास करती दिखाई देती है।यह कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखती हैं।किसी समय दूसरों के घरों में काम करने वाली महिला का राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेना यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और अवसर मिल जाए तो जीवन की दिशा बदल सकती है।लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव कराने में नहीं है चुनाव के बाद सियासी गाडित की हार जीत में भी नहीं उसकी असली सफलता तब दिखाई देती है जब समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी नेतृत्व की भूमिका तक पहुंच सके।पश्चिम बंगाल के राजभवन में लिया गया यह शपथ केवल एक मंत्री का शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि यह उस विचार का उत्सव था कि भारत में संघर्ष, मेहनत और जनता का विश्वास किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
अभिषेक तिवारी
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