पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है— सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योकि 2021 के चुनावो में तमाम अटकलों के बाद भी ममता बनर्जी सभी को चौकाया था इसलिए इस बार भाजपा ने कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी । फिर भी मुकाबला इकतरफा नहीं हो सका ।
क्या ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी, या भारतीय जनता पार्टी पहली बार बंगाल के किले को फतह कर इतिहास रचेगी एग्जिट पोल के आंकड़ों ने इस बार बंगाल की राजनीति को और भी दिलचस्प बना दिया है। कई सर्वे भाजपा को बढ़त दिखा रहे हैं, जबकि कुछ सर्वे अब भी तृणमूल कांग्रेस को मजबूत स्थिति में बता रहे हैं। यही वजह है कि नतीजों से पहले ही सियासी तापमान चरम पर है।
कई एग्जिट पोल—जैसे Matrize, P-Marq, Praja Poll और Poll Diary—ने भाजपा को बढ़त दी है। कुछ अनुमानों में भाजपा को बहुमत के आंकड़े 148 से ऊपर, लगभग 150–160 सीटों तक पहुँचता दिखाया गया है। वहीं Today’s Chanakya ने भाजपा के लिए और भी बड़ी बढ़त का दावा किया है।
इसका मतलब यह है कि भाजपा ने केवल शहरी इलाकों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण बंगाल और सीमावर्ती जिलों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है।
इसके पीछे कुछ बड़े कारण माने जा रहे हैं—
विशेष रूप से उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन निर्णायक माना जा रहा है।
हालाँकि, सभी एग्जिट पोल भाजपा की जीत नहीं बता रहे। Peoples Pulse और Janmat Polls जैसे कुछ सर्वे तृणमूल कांग्रेस को बढ़त देते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता, महिला योजनाएँ और ग्रामीण नेटवर्क अभी भी बहुत मजबूत हैं।बंगाल की राजनीति में “दीदी फैक्टर” को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
ममता बनर्जी पहले भी एग्जिट पोल को गलत साबित कर चुकी हैं।
बंगाल में अक्सर वोट प्रतिशत का अंतर बहुत कम होता है,लेकिन सीटों का अंतर बहुत बड़ा निकलता है।
यदि भाजपा और TMC के बीच वोट शेयर में केवल 1–2% का अंतर हो, तो सीटों में 30–40 का फर्क आ सकता है। यही कारण है कि एग्जिट पोल का अनुमान भी पूरी तरह अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
ममता बनर्जी ने एग्जिट पोल पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं से EVM पर नजर रखने और अंतिम मतगणना तक सतर्क रहने को कहा है। विपक्ष का आरोप है कि एग्जिट पोल “मनोवैज्ञानिक नैरेटिव” बनाने का प्रयास भी हो सकते हैं। उन्होंने दवा किया है कि बंगाल में हर हाल में उनकी सरकार की वापसी तय है ।
यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं,तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा।34 साल वामपंथ, फिर ममता बनर्जी का एक दशक से अधिक का शासन—इन दोनों के बाद भाजपा का सत्ता में आना केवल सरकार बदलना नहीं,बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का परिवर्तन माना जाएगा। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं, लेकिन संकेत मजबूत हैं—
इस बार पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद करीबी है।
यदि भाजपा बहुमत तक पहुँचती है,तो यह राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश होगा।और यदि ममता बनर्जी फिर वापसी करती हैं,तो यह उनके राजनीतिक कौशल की एक और बड़ी जीत मानी जाएगी।
अंततः एग्जिट पोल केवल संकेत हैं,असली फैसला जनता का होता है—और वह मतगणना के दिन सामने आएगा।
बंगाल की लड़ाई इस बार सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि राजनीतिक भविष्य की लड़ाई है। उसे भी अधिक यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राजनैतक कौशल की साख का सवाल है ।
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