राजनीतिनामा

आज नहीं तो कल टूटेगी तृणमूल कांग्रेस

बंगाल (पश्चिम बंगाल) में तृणमूल कांग्रेस आज नहीं तो कल टूट जाएगी, क्योंकि 294 सीटों में से 208 सीटें जीतकर सरकार बनाने के बाद भी भाजपा का पेट भरा नहीं है. भाजपा नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस को विभाजित करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है. पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक जीते हैं.2026 के विधानसभा चुनाव में तृमूकां के पास लगभग 80-81 विधायक हैं. आपको याद होगा कि पिछले 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने में 213 सीटें जीती थी, लेकिन 2026 में तृमूकां की करारी हार हुई. लेकिन भाजपा जीत के बाद भी रुकी नहीं है. भाजपा की ओर से तृमूकां को तोड़ने की कोशिश हो रही है. विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृमूकां में भीतर गहरी अस्थिरता चल रही है और पार्टी को तोड़ने की कोशिशें साफ दिख रही हैं. इसी के चलते तमूकां ने हाल ही में अपने 2 विधायकों ऋतव्रत बनर्जी और संदीन शाहा को निष्कासित कर दिया.इन विधायकों ने आरोप लगाया था कि पार्टी नेतृत्व ने उनके और अन्य विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर लगाकर विपक्ष के पदों के लिए पत्र भेजा है.
                                               तृमूका में विभाजन की आशंका इसलिए भी बढ गई है क्योंकि ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई मीटिंग में पार्टी के 59 विधायक गैर-हाजिर रहे. जाहिर तौर पर ये पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध बगावत का शंखनाद है
आपको याद होगा कि भाजपा की फितरत है कि वह अपने सहयोगी दलों को ही नहीं अपितु विपक्ष को भी विभाजित करती रही है. मप्र में कांग्रेस, महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना, हरियाणा में जेजेपी, पंजाब में अकाली दल को विभाजित कर उनकी ताकत कम की गई. अब बारी बंगाल की है.बंगाल में तृमूकां में बागी गतिविधियों की खबरें आ रही हैं. भाजपा की ओर से अप्रत्यक्ष दबाव या संपर्क की अटकलें हैं.तृमूकांग्रेस खुद आरोप लगा रही है कि भाजपा उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है.बंगाल में डेढ दशक के शासन के बाद तृमूकां अभी भी 80 सदस्यों के साथ एक मजबूत विपक्षी दल है, आंतरिक कलह, निष्कासन और सिग्नेचर विवाद के कारण पार्टी टूटने का खतरा मंडरा रहा है. अगले कुछ हफ्तों में ये गतिविधियं और तेज हो सकती है.भाजपा की नृशंस कोशिशों से घबडाई तृमूका एक बार फिर इंडिया गठबंधन के साथ अपनी निकटता बढाती दिखाई दे रही हैं. मुझे लगता है कि अब अपनी पार्टी का वजूद बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास कोई विकल्प नही बचा है. वे अकेले भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकतीं.तृमूकां के नवनिर्वाचित विधायक पिछले दिनों पार्टी के दो सांसदों पर हुए जानलेवा हमले से भी भयभीत हैं.
श्री राकेश अचल  ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश

⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए  कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद।

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

सागर के एडवोकेट अजय श्रीवास्तव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

किसी फार्मेसी पाठ्यक्रम को अनुमोदन मिलने के बाद उसे हर साल पुनः अनुमोदन लेने के…

15 hours ago

मध्यप्रदेश – कौंडियों से तय नहीं होती नेता की औकात

हम इक्कीसवीं सदी में आ जरूर गये लेकिन आज भी हमने किसी की कीमत आंकने…

1 day ago

लोकतंत्र : बर्तन मांजने वाली महिला से मंत्री पद तक का सफर

 आजादी के बाद से ही भारत में लोकतंत्र की उम्र और मजबूती को लेकर कई…

2 days ago

त्विषा शर्मा केस – ऊंट का पहाड़ के नीचे आना

भारतीय मुहावरे और कहावतें मुझे सिर्फ इसीलिए पसंद हैं क्योंकि वे सटीक भी लगती हैं…

4 days ago

मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र अब हमारे बीच नहीं रहे

1955 में मिसरिख (सीतापुर) के तरही मुशायरे की सदारत एक सूरत सीलदार कर रहे थे…

5 days ago

उत्तरप्रदेश में एक पत्नी की ये कैसी हैवानियत !

आज के दौर में अपराध की हदें रोज एक नया रिर्काड सा बनाती हुई लगती…

1 week ago