राजनीतिनामा

आदिवासियों का अंदाज आंकने का चुनाव

भोपाल। प्रदेश में मिशन 2023 की तैयारियों में जुटे भाजपा और कांग्रेस का सबसे ज्यादा फोकस आदिवासी मतदाताओं पर है। इस वर्ग को अपनी ओर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आज हो रहे नगरीय निकाय के चुनाव में अधिकांश चुनाव इसी वर्ग के बीच है माना यही जा रहा है कि इन चुनाव के परिणाम से आदिवासियों का मूड किस तरफ है चुनाव परिणामों से अंदाजा लग सकेगा।

दरअसल, राजनीति में हर चुनाव में होता है लेकिन जब कोई चुनाव आम चुनाव के पहले हो और किसी विशेष वर्ग के बीच होने जा रहा हो तब इन चुनाव पर राजनीतिक दलों की गहरी दिलचस्पी होती है। कुछ ऐसा ही हो रहा है प्रदेश में। आज 46 नगरीय निकाय के चुनाव के लिए मतदान होगा। जिसके लिए पिछले एक पखवाड़े से भाजपा और कांग्रेस पूरी ताकत लगाए हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस में अपने नेताओं को बहुत पहले से इन चुनाव की जिम्मेदारियां सौंप दी थी। प्रदेश का चुनावी इतिहास इस बात का गवाह है कि जिधर आदिवासी वर्ग का झुकाव होता है उस तरफ ही सरकार बन जाती है।

बीच में तो आदिवासी वर्ग में अपना दल, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाकर अपना शक्ति प्रदर्शन भी किया है लेकिन बाद में फूट ढल गई और यह संगठन बिखर गया। इसी तरह जयस संगठन भी बना लेकिन वह भी अब विवादों में है। 2003 से 2008, 2013 और 2018 के चुनाव परिणाम बताते हैं कि आदिवासी वर्ग का जिस पार्टी को अधिकांश समर्थन मिल गया है उसकी सरकार बन गई। 2018 में 15 वर्षों के बाद कांग्रेस की सरकार बनी उसमें आदिवासी वर्ग का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा और तब से ही कांग्रेस जहां इनको अपनी और बनाए रखने के लिए कसरत कर रही है, वहीं भाजपा प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक आदिवासी वर्ग को पार्टी से जुड़ने के लिए अथक परिश्रम कर रही है। इन कोशिशों का इस वर्ग पर किसका कितना असर है शायद इसका अंदाजा इन नगरीय निकाय के चुनाव में लग जाएगा और उसी के बाद दोनों ही दल मिशन 2023 के लिए रणनीति बनाएंगे। इसी कारण यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। कुछ ऐसे भी इलाके हैं जहां आदिवासी वर्ग के मतदाता नहीं है लेकिन वहां के गढ़ बन चुके नेताओं के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण है।

बहरहाल, चुनाव प्रचार थमने के बाद सोमवार को दिन भर घर-घर दस्तक देने का दौर जारी रहा। वहीं मतदान दल केंद्रों पर पहुंचने की कोशिश में रहा। आज सुबह 7:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक इन क्षेत्रों में मतदान होना है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा में इस बार भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां सभाएं करके छोटे चुनाव में भाजपा को वोट देने की अपील की है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे सांसद नकुल नाथ ने भी अपने क्षेत्र बचाए रखने के लिए क्षेत्र में ही डेरा डाल रखा है।

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस में मचे घमासान के चलते कमलनाथ को हालांकि दिल्ली जाना पड़ा लेकिन उनके समर्थक मुस्तैदी से मैदान में डटे हुए हैं। बुंदेलखंड के 3 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं और तीनों ही सीटों भाजपा ने जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। खुरई में कांग्रेस लगभग मैदान ही छोड़ चुकी है। गढ़ाकोटा में मंत्री गोपाल भार्गव का क्षेत्रवासियों के साथ मृदुलता का मजबूत संबंध कांग्रेस के लिए चुनौती बना हुआ है। जैसे-तैसे कांग्रेस ने प्रत्याशी तो खड़े कर दिए जिस वार्ड में प्रत्याशी नहीं मिला दूसरे वार्ड से लाकर खड़ा कर दिया लेकिन समर्थक जुटाने में कांग्रेस को जिस तरह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा है उससे मतदाताओं के बीच कांग्रेस की कमजोरी भी उजागर हो गई। वहीं करापुर नगर परिषद में भी आखिरी दौर में भाजपा ने स्थिति को बहुत कुछ संभाल लिया है।
कुल मिलाकर आज होने वाली नगरी निकाय के चुनाव आदिवासियों के मन मे क्या चल रहा है। इसका अंदाजा तो 30 तारीख को कराएंगे ही भाजपा और कांग्रेस के लिए 2023 के लिए रणनीति बनाने के लिए प्रेरक का काम भी करेंगे।

 

देवदत्त दुबे भोपाल मध्यप्रदेश 

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