कांग्रेस नेता राहुल गांधी आजकल संविधान बचाओ मुहिम में जुटे हुए है संविधान को खतरा क्यों है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन राहुल हर मंच से इसे जाति और जातिगत जनगणना से जरूर जोड़ते है । झारखंड के रांची में तो राहुल ने एक कदम बढकर इस बहस में मनुस्मृति को भी शामिल कर लिया और बेतुका बयान देते हुए कहा कि मनुस्मृति संविधान विरोधी है मजेदार बात यह है कि हजारों साल पुरानी मनुस्मृति को पढने वाले आज देश में कितने लोग है और क्या खुद राहुल गांधी ने मनुस्मृति को पढा है यह देश पिछले 75 सालों से संविधान से चल रहा है तो फिर मनुस्मृति उसे बराबर कैसे आ सकती है और पिछले दो दशक से सक्रिय राजनीति में रहे राहुल गांधी को अचानक मनुस्मृति क्यों याद आई मोदी राज के पिछले 10 सालों मंे भी कभी उन्होने इस तरह के बयान नहीं दिये फिर वे लगातार इस तरह के विभाजनकारी बयान क्यो दे रहे है ।
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