लोकतंत्र-मंत्र

तीन दशक का इंतजार खत्म,अब 33% भागीदारी का रास्ता साफ –  सांसद वानखेड़े

 सागर संसद में सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने संविधान संशोधन विधेयक, संघराज्य क्षेत्र शासन विधि संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक के समर्थन में प्रभावशाली भाषण दिया। उन्होंने इन विधेयकों को केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को अधिक सशक्त, पारदर्शी और प्रतिनिधित्व बनाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।अपने संबोधन में उन्होंने विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व का अवसर प्रदान करेगा। सांसद ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से गांव में पंच और तीन बार सरपंच रहने के बाद आज वह संसद तक पहुंची हैं। उन्होंने इसे अपनी नहीं, बल्कि देश की हर महिला की उपलब्धि बताया, जिसे अवसर मिलने पर वह इतिहास रच सकती है।सांसद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा तीन दशकों तक लंबित रखा गया। 1996 से लेकर 2014 तक इस पर चर्चा तो हुई, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय महिलाओं की क्षमता कम थी या फिर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया।

वहीं, वर्तमान सरकार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि तीन दशक तक लंबित रहा यह विधेयक अब कुछ ही दिनों में पारित कर दिया गया, जो स्पष्ट करता है कि नियत और नेतृत्व में कितना अंतर होता है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आधार है। सांसद ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 14 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत 24 प्रतिशत से काफी कम है। कई राज्यों की विधानसभाओं में यह आंकड़ा 5 प्रतिशत से भी नीचे है। ऐसे में परिसीमन विधेयक के माध्यम से महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित होना एक बड़ा बदलाव साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर एक प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में उभर रहा है और महिला सशक्तिकरण उसकी प्रमुख पहचान बनता जा रहा है। उनका मानना है कि यह अधिनियम देश की हर महिला के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।अपने भाषण के अंत में सांसद ने कहा कि अब देश की महिलाएं प्रतीक्षा नहीं करेंगी, बल्कि अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि ये तीनों विधेयक भारत के लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

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