अयोध्या। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित करोड़ों रुपये की चोरी ने पूरे देश को झकझोर दिया है। मामला अब इतना गंभीर हो चुका है कि उत्तर प्रदेश सरकार को इसकी जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करनी पड़ी है। सोमवार को एसआईटी अयोध्या पहुंची और सीधे राम मंदिर ट्रस्ट कार्यालय में जांच शुरू कर दी।सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई जिम्मेदार पदाधिकारियों से प्रारंभिक जानकारी ली है। वहीं ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ किए जाने की भी खबर है।
इस मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार उनकी निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। हालांकि प्रारंभिक अनुमान सात से आठ करोड़ रुपये तक की चोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।गिरफ्तार आरोपियों में लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर के नाम सामने आए हैं। ये सभी मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में तैनात बताए जा रहे हैं। पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है।
जांच को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अयोध्या रवाना होने से पहले एसआईटी के सदस्यों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।
तीन सदस्यीय इस टीम में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर करोड़ों रुपये की यह राशि कब, कैसे और किन लोगों की मिलीभगत से गायब हुई।राम मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दान करते हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जिस धन को भगवान राम के चरणों में समर्पित किया गया, उसकी सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?
क्या यह केवल कुछ कर्मचारियों की करतूत थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था? क्या निगरानी तंत्र में खामियां थीं या फिर जवाबदेही तय नहीं की गई थी? इन सवालों के जवाब अब एसआईटी की जांच से ही सामने आएंगे।
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने साफ संकेत दिए हैं कि मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच और सुधार दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चल रही हैं ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास अक्षुण्ण बना रहे।यह मामला केवल पैसों की चोरी का नहीं है। यह उन करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा प्रश्न है, जो अपनी श्रद्धा और आस्था के साथ रामलला को दान अर्पित करते हैं। इसलिए देश की नजर अब एसआईटी की जांच पर है।
सवाल केवल यह नहीं है कि चोरी किसने की, बल्कि यह भी है कि क्या इस जांच के बाद ऐसी व्यवस्था बनेगी जिससे भविष्य में आस्था के धन पर कोई हाथ डालने की हिम्मत न कर सके।
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