सतना ब्लड बैंक कांड – थैलेसीमिया पीड़ित मासूमों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना

सतना ब्लड बैंक कांड – थैलेसीमिया पीड़ित मासूमों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना

सतना ब्लड बैंक कांड  6 थैलेसीमिया मासूम HIV संक्रमित, NHRC ने लिया संज्ञान

; स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, जांच कमेटी गठित

सतना।  मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया पीड़ित मासूमों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना ने अब और विकराल रूप धारण कर लिया है। चार की बजाय छह बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। यह मामला चार महीने पुराना है, लेकिन मंगलवार (16 दिसंबर 2025) को मीडिया खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी करने की तैयारी की है, जबकि राज्य स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने अपने स्तर पर जांच कर पुष्टि की कि एक बच्चे के माता-पिता भी पॉजिटिव पाए गए हैं। थैलेसीमिया से जूझ रहे ये मासूम बच्चे लगातार ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर थे। स्वैच्छिक रक्तदाताओं से लिया गया रक्त बिना उचित स्क्रीनिंग के चढ़ाया गया, जिससे HIV संक्रमण फैल गया। कलेक्टर ने बताया, “छह बच्चे HIV पॉजिटिव हैं। एक के माता-पिता की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई, बाकी निगेटिव।” परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है। एक परिजन ने कहा, “बच्चे की जान बचाने अस्पताल गए, लेकिन मौत बुला लाए।” NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा, “संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करेंगे। मासूमों के अधिकारों का उल्लंघन अक्षम्य है।” स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी ने रीवा संभाग की क्षेत्रीय संचालक डॉ. सत्या अवधिया की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है, जो सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी ब्लड बैंक की प्रक्रियाओं, रक्तदाताओं की स्क्रीनिंग और लापरवाही के हर पहलू की जांच करेगी। नया इंडिया की जांच में सामने आया कि रक्त लेने से लेकर चढ़ाने तक हर स्तर पर गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सभी जांचें समय पर हुई होतीं, तो यह नौबत न आती।

लापरवाही की पूरी चेन: स्क्रीनिंग से लेकर जांच तक चूक ब्लड बैंक में लापरवाही की श्रृंखला ने मासूमों की जिंदगी दांव पर लगा दी। गाइडलाइन के अनुसार: – रक्त लेने से पहले रक्तदाता का ब्लड ग्रुप, अल्कोहल, शुगर, मलेरिया, HIV, सिस्टाइटिस, रेड ब्लड सेल की संख्या, हेपेटाइटिस बी और सी की जांच अनिवार्य है। लेकिन यहां बेसिक स्क्रीनिंग में ही चूक हुई। – अगर बच्चे को अन्य ब्लड बैंकों से रक्त चढ़ाया गया हो, तो संबंधित बैंक से पत्राचार कर जानकारी लेनी चाहिए थी, जो नहीं की गई। – HIV टेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाली ELISA मशीन के रिएजेंट कभी-कभी उपलब्ध न होने पर रक्त की बाद में जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह लापरवाही चार महीनों से छिपी रही, जिसका खुलासा रूटीन रिपोर्ट से हुआ। सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला ने स्थानीय स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई, जिसमें थैलेसीमिया नोडल डॉ. संदीप द्विवेदी, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और हॉस्पिटल मैनेजर डॉ. धीरेंद्र वर्मा शामिल हैं। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि जिस प्रभारी ने गंभीरता नहीं दिखाई, उसे ही कमेटी में क्यों रखा गया?

वायरल नोटिस और जिम्मेदारों पर सवाल: प्रसन्नता या अप्रसन्नता? सिविल सर्जन ने एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता को नोटिस जारी किया, लेकिन पत्र में ‘अप्रसन्नता’ की जगह ‘प्रसन्नता’ लिखा था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। मंगलवार को ब्लड बैंक का रिकॉर्ड खंगाला गया, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी बरकरार है। जिम्मेदारों में शामिल हैं: 1. ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल – स्क्रीनिंग में चूक। 2. आईसीटीसी प्रभारी डॉ. पूजा गुप्ता – टेस्टिंग प्रक्रिया में लापरवाही। 3. ब्लड बैंक काउंसलर नीरज सिंह तिवारी – रक्तदाताओं की सलाह में कमी। 4. निजी कंपनी सूर्या के स्थानीय मैनेजर – बैंक संचालन में जवाबदेही निभाने में असफल। क्या अब सख्त कार्रवाई होगी? स्वास्थ्य विभाग ने वादा किया है कि दोषियों पर विभागीय जांच के बाद एक्शन लिया जाएगा। मासूमों का इलाज राज्य स्तर पर होगा, लेकिन भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए ब्लड बैंक नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। परिवार न्याय की उम्मीद में हैं।

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