दुनिया

हूवर बांध : जो खुद कमाता -खाता है

अमरीकियों की खासियत है कि वे सफेद हांथी नहीं पालते। अमरीकी अगर हाथी पालते भी है तो उसी से कमाते -खाते भी है। अमेरिका में लॉस वेगास से कोई 70 किमी दूर दुर्गम पहाड़ियों को काटकर कोलोराडो नदी पर बना हूवर बांध इस बात का उदाहरण हैं। दुनिया में किले,बांध और दीवारें आड़े वक्त में जनता को रोजगार देने या फिर सत्ता की सनक के चलते बनते रहे हैं। लोककल्याण और विकास भी एक वजह रही है। हूवर बांध के निर्माण के पीछे लोक कल्याण और विकास असली वजह रही। जैसे भारत में सरदार सरोवर बांध है उससे भी दुर्गम हूवर बांध है।हूवर सफेद हांथी नहीं है।इस बांध का रखरखाव यहां बनने वाली बिजली बेचकर और पर्यटकों से लिए जाने वाले पार्किंग शुल्क से हो जाता है। बात बीसवीं सदी के शुरू की है।1900 में एरिजोना और नावेदा राज्य की सीमा पर ब्लेक केनियन और बोल्डर के निम्न के बीच की पर्वत श्रृंखला को काटकर बाढ़ रोकने, सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और विद्युत उत्पादन करने के मकसद से एक बांध बनाने का विचार किया गया। कोई 28 साल बाद सरकार ने बांध परियोजना को हरी झंडी दिखाई।छह कंपनियों ने इसका ठेका लिया और 1931 में निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

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अमेरिका में या दुनिया में कहीं भी सीमेंट कांक्रीट की इतनी बड़ी संरचना कभी बनी नहीं थी। तकनीक भी प्रामाणिक न थी, लेकिन इच्छाशक्ति सबसे बड़ा बल था। छहो कंपनियों ने विपरीत परिस्थितियों के चलते हुए भी 1936 में ये बांध समय से दो साल पहले बनाकर तैयार कर लिया।बांध जिसने देखा दांतों तले उंगलियां दबा लीं।तेज गर्मी की वजह से बांध बनाते समय सौ से ज्यादा श्रमिकों की जान गई, लेकिन जो चीज सामने आई वो अद्वितीय थी। हूवर बांध आज एरिजोना, नेवादा और केलिफोर्निया को बिजली बेचता है। सरकार ने यहां कोई विशाल मूर्ति लगाए भी बांध को एक ऐसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है जहां कि प्रति वर्ष 07 मिलियन पर्यटक आते हैं। हूवर बांध तक पहुंचने के लिए शानदार फोरलेन सड़क है।बांध तक जाने से पहले सुरक्षा जांच होती है।आप यहां कार पार्किंग का 10 डालर देकर पांच मंजिला पार्किंग में कार खड़ी कर लिफ्ट के जरिए बांध तक जा सकते हैं। बांध घूमने के लिए आप टूर गाइड की सेवाएं भी ले सकते हैं। हां ये मंहगा सौदा है। बांध के ऊपर गगन चुंबी पुल देखते ही बनता है। पर्यटकों के लिए वातानुकूलित और ओपन एयर रेस्टोरेंट है, साथ ही एक शानदार सोविनयर शाप भी। बांध का नाम तत्कालीन राष्ट्रपति हार्बर्ट हूवर के नाम पर रखा गया।30 सितंबर 1935 को तबके राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट ने बांध का लोकार्पण किया था। रूजवेल्ट प्रशासन ने बांध का नाम बोल्डर शहर के नाम पर रखा लेकिन 1947 में सरकार ने इसे फिर हूवर का नाम दे दिया जो अब अमरीकी गौरव का प्रतीक है।1931 में इस बांध का बजट 49 मिलियन अमरीकी डालर था जो आज के 700 मिलियन अमरीकी डालर के बराबर होता है। करीब 726,4फीट ऊंचे और 1244 फीट लंबे इस बांध का एलिवेशन 1232फीट का है। बांध की क्षमता 3250,000क्यूयार्ड है।इसका जलग्रहण क्षेत्र 450000 वर्ग किलोमीटर है। यहां 2032 मेगावाट बिजली बनती है। यदि आपके पास समय है तो इत्मीनान से तीन घंटे में इस बांध का भ्रमण कर सकते हैं। बांध तो खूबसूरत है ही पर्वत श्रृंखला भी मनोहर है।

व्यक्तिगत विचार-आलेख-

श्री राकेश अचल जी ,वरिष्ठ पत्रकार , मध्यप्रदेश  । 

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