दुनिया

जंग तो रुकेगी लेकिन किसकी शर्तों पर ?

खाडी युद्ध पर लिखने के लिए कुछ भी नया नही है सिवाय इसके कि जंग कब रुकेगी और किसकी शर्तों पर रुकेगी? अमेरिका एकतरफा पांच दिवसीय युद्ध विराम का ऐलान कर चुका है जबकि ईरान ने सशर्त युद्ध विराम की बात कही है.युद्ध की वजह से शिकार और शिकारी ही नहीं अडोसी-पडौसी भी हलकान हैं. इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ छेडी गई जंग खरामा-खरामा एक महीने की होने वाली है. 27 दिन तो पूरे हो ही गए हैं, किंतु युद्ध समाप्त होना तो दूर अभी इसमें विराम भी लगता नहीं दिखाई दे रहा.दोनों ओर से जंग जारी है.खाडी में जंग कोई नयी बात नही है, लेकिन ये पहली बार हुआ है कि किसी मुल्क ने पारंपरिक हथियारों के साथ ही भूगोल का इस्तेमाल भी हथियार के रूप में किया है. होर्मुज नाम के इस हथियार ने हमलावर मुल्कों के साथ ही हमलावरों के शुभचिंतक तमाम मुल्कों की नींद हराम कर दी है.
                               ईरान को सबक सिखाने के लिए किए गए हमले से पहले हमलावरों को ये उम्मीद न थी कि ईरान इतने दिन युद्ध में टिक पाएगा. ईरान ने हमलावरैं के तमाम अनुमान गलत साबित कर दिए और युद्ध को चौथे सप्ताह तक खींच दिया. हमलावरों को यकीन था कि ईरान अयातुलल्लाह खोमेनी की हत्या के बाद पस्त होकर समर्पण कर देगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. ईरान में सत्ता का परिवर्तन भी नही हुआ और ईरान घुटनों के बल बैठा भी नहीं. ईरान लगातार लड रह है.ये पहली बार हुआ है कि हमलावरों ने अपनी ओर से युद्धविराम का ऐलान किया है अन्यथा युद्धविराम का सफेद परचम तो हमेशा पीडित मुल्क की ओर से दिखाया जाता है.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्धविराम की पेशकश के जबाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ‘कई दिनों से अमेरिका ने अलग-अलग मध्यस्थों के ज़रिए संदेश भेजना शुरू कर दिया है.’अराग़ची ने ईरान के सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में यह बयान दिया है.उनका कहना है कि ये संदेश “मित्रवत देशों के ज़रिए भेजे गए”, और ईरान ने अपनी “स्थिति बताई है और चेतावनी देकर” इसका जवाब दिया है.अराग़ची ने कहा, “यह न तो बातचीत है, न मोल-भाव और न ही ऐसा कुछ है.”उन्होंने कहा, “ईरान की नीति अब भी अपनी सुरक्षा करने की है और ‘’अभी बातचीत का कोई इरादा नहीं’ है.”अराग़ची ने आगे कहा, “यह इसराइल की लड़ाई है और अमेरिका के साथ ही इस इलाक़े के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं.”
                           सब जानते हैं कि हर जंग का नतीजा विनास और बाद में युद्धविराम होता है. ब देखना ये है कि युद्धवाराम किस की शर्तों पर होता है. अमेरिका ने एक तरफ युद्ध विराम की पेशकश की है और दूसरी तरफ 7 हजार अतिरिक्त सैनिक भी ईरान के आसपास उतार दिए हैं, इससे ईरान को अमेरिका की पेशकश संदिग्ध लग रही है. अमेरिका बातचीत के लिए जिन मुल्कों को मध्यस्थ बनाना चाहता है उनकी कोई हैसियत नहीं है.बिना पंचों के बातचीत कैसे शुरू होगी?इस युद्ध में हालांकि अभी तक परमाणु बम का इस्तेमाल नही हुआ है लेकिन खाडी का तेल ही आधी दुनिया का तेल निकाले दे रहा है. 146 करोड की आबादी के भारत समेत तमाम देशों का तेल निकलने लगा है.नौबत ऊर्जा आपातकाल लागू होने तक की आ गई है.चीन और रूस इस जंग में फायदे में हैं वे मूक दर्शक भी हैं और नहीं भी. दोनों बीच -बीच में घुडकी देते रहते हैं
बहरहाल दुनिया की नजर है इस खाडी जंग पर. ये जंग भी वियतनाम और अफगानिस्तान की जंग की तरह समाप्त होगी. खाडी की जंग रूस और यूक्रेन की जंग नहीं है जो चार साल तक खिंच जाए. यदि खाडी जंग चार महिने भी खिंच गई तो आधी दुनिया का अर्थशास्त्र चौपट हो जाएगा.
श्री राकेश अचल  ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश

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