सम्पादकीय

बागेश्वर धाम-आस्था, सामाजिक सेवा और बहस का संगम

मध्यप्रदेश के छतरपुर ज़िले स्थित बागेश्वर धाम एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में यहाँ लगभग 300 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। इस आयोजन को धाम के प्रमुख कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामाजिक सरोकारों से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थक इसे सेवा और सनातन परंपरा के संवर्धन का बड़ा कदम बता रहे हैं, तो आलोचक इसे प्रतीकात्मक या प्रचारात्मक पहल कहकर प्रश्न भी उठा रहे हैं। धीरेन्द्र शास्त्री इससे पहले भी सामाजिक सरोकार से जुड़े बड़े आयोजन कर चुके हैं और राष्ट्रपति प्रधानमंत्री भी इन आयोजनों में सहभागिता कर चुके हैं । सोशल मीडिया पर शास्त्री के समर्थको और आलोचकों की तादात भारती है इसलिए उनके द्वारा किये गए कार्य अथवा बयां हमेशा सुर्ख़ियों में रहते हैं  हाल के विवाह समारोह पर भी यही आलम है ।

                                   सामूहिक विवाह जैसे आयोजन भारत में लंबे समय से सामाजिक सहयोग का माध्यम रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विवाह का खर्च अक्सर बड़ी चिंता का कारण बनता है। ऐसे में एक साथ सैकड़ों कन्याओं का विवाह कराना न केवल आर्थिक बोझ कम करता है, बल्कि सामाजिक सम्मान भी प्रदान करता है।बागेश्वर धाम में आयोजित इस कार्यक्रम में विवाह की पारंपरिक विधि, आवश्यक गृहस्थी सामग्री और सामूहिक आशीर्वाद की व्यवस्था की गई। आयोजकों का दावा है कि इससे समाज के वंचित वर्गों को वास्तविक सहायता मिली है। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री और बागेश्वर धाम पहले भी विभिन्न कारणों से विवादों में रहे हैं। आलोचक पूछते हैं कि क्या ऐसे आयोजनों के पीछे दीर्घकालिक सामाजिक सुधार की कोई योजना है या यह केवल एक भव्य आयोजन भर है। वे पारदर्शिता, धन के स्रोत और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हैं समर्थकों का कहना है कि जब सरकारें और संस्थाएँ सामाजिक कल्याण के लिए योजनाएँ चलाती हैं, तो धार्मिक संस्थाओं की पहल को भी सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी आयोजन से सैकड़ों परिवारों को राहत मिलती है, तो उसे केवल राजनीतिक या प्रचार की दृष्टि से आंकना उचित नहीं है। वर्तमान में जब देश जातिवाद के मुद्दे पर उबाल रहा है तब बिना किसी भेदभाव के यह आयोजन जनता को एक कढ़ी में पिरोते हैं बुंदेलखंड क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में धार्मिक-सामाजिक आयोजनों का राजनीतिक प्रभाव भी स्वाभाविक है। इस विवाह समारोह को कुछ लोग सांस्कृतिक पुनरुत्थान के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक प्रभाव के विस्तार की रणनीति मानते हैं। तो कुछ किसी राजनैतिक दल का प्रचार कार्यक्रम भी कहते हैं । बहरहाल बागेश्वर धाम में 300 कन्याओं का सामूहिक विवाह एक ऐसा आयोजन है, जिसने आस्था, सेवा और राजनीति—तीनों को एक मंच पर ला दिया है। यह पहल जहां सैकड़ों परिवारों के लिए राहत और सम्मान का कारण बनी, वहीं इससे जुड़ी बहस भी समाज में जारी है। आख़िरकार, किसी भी सामाजिक पहल का मूल्यांकन उसके दीर्घकालिक प्रभाव से होता है—यदि ऐसे आयोजन निरंतर और पारदर्शी ढंग से होते रहें, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकते हैं भले ही  इसके पीछे चलने वाली सामाजिक -राजनैतिक बहस और आलोचना कितनी भी ताकतवर क्यों न हो ।

अभिषेक तिवारी

⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए  कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद।

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

एआई सम्मेलन प्रगति मैदान के भारत मंडपम में शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एआई इमपैक्ट समिट-2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। पांच दिन…

4 hours ago

पटनेश्वर धाम- 800 साल पुराना है शिव मंदिर, अनोखी है इससे जुड़ी कहानी

रानी का पटनेश्वर स्वप्न, बना इकलौता धाम जहां महाशिवरात्रि से पहले होता है शिव विवाह…

3 days ago

शिव ही सत्य है, शिव अनंत है शिव अनादि है, शिव भगवन्त है

शिव ही सत्य है, शिव अनंत है। शिव अनादि है, शिव भगवन्त है।। शिव ही…

3 days ago

नोहलेश्वर महोत्सव आस्था के साथ संस्कृति, परम्परा और सामाजिक समरसता का उत्सव – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आस्था के सभी स्थलों का विकास कर रही सरकार नोहटा को बनाया जाएगा नगर परिषद…

4 days ago

बागेश्वर धाम में सामूहिक विवाह कार्यक्रम की पहल सराहनीय : मुख्यमंत्री यादव

महाशिवरात्रि पर्व पर तीन दिवसीय सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री वैदिक मंत्रोच्चार…

4 days ago

सागर में एयरपोर्ट निर्माण को लेकर  केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात

सागर सागर लोकसभा क्षेत्र के विकास और नागरिकों को  सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सागर…

4 days ago