विशेष - बात

अब कहीं जाकर सठियाये मोहन यादव

मप्र के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव 60 साल के हो गये.इस वयसंधि के लिए एक लोकोक्ति प्रचलित है -‘साठा सो पाठा’. लोग इसे सठियाना भी कहते हैं लेकिन सठियाने का अर्थ वह नही है जो समझा जाता है. सही अर्थो में सठियाना परिपक्व होने की निशानी है. मोहन बाबू 25 मार्च 1965 की पैदाइश हैं. यानि 60 पार कर लिए. उनके लिए “साठा सो पाठा” लागू हो सकती है.इस कहावत का मतलब होता है:कि जो व्यक्ति 60 साल की उम्र में भी स्वस्थ, सक्रिय और चुस्त है, वह किसी युवा (पाठा = जवान/तगड़ा व्यक्ति) से कम नहीं होता। आसान भाषा में कहिए तो साठा = 60 साल का व्यक्ति और पाठा = मजबूत, जवान, ताकतवर आदमी यानी “अगर 60 की उम्र में भी दम है, तो तुम अभी भी जवानों जैसे हो।”आप कह सकते हैं कि यह उम्र नहीं, तंदुरुस्ती और जोश को महत्व देती है।
                              मुख्यमंत्री मोहन यादव ऊर्जा से भरपूर हैं, सुबह से शाम तक चकरघिन्नी रहते हैं. आजकल तो वे मिस्टर इंडिया के नायक की तरह काम कर रहे हैं. चुटकी बजाकर फैसले ले रहे हैं सीधी और गुना के कलेक्टर और एसपी का तबादला इसका उदा है. बावजूद इसके वे 27 महीने में अपनी विशेष छवि बनाने में नाकाम रहे हैं. विसंगति ये है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में यादव जी नितांत अकेले हैं. न उनकी पत्नी राजनीती में बहुत दिलचस्पी लेती नजर आती हैं न बच्चे. मुख्यमंत्री के रूप में योगासन से लेकर सुशा तक खुद ही देखना पड रहा है. इसका नफा भी है और नुकसान भी है. नफा ये है कि 27 महीने बाद भी विपक्ष या मीडिया ने मुख्यमंत्री आवास में नोट गिनने की मशशीन लगाने का आरोप नही लगाया है. मैने मप्र के तमाम मुख्यमंत्री देखे हैं, शालीन, शौकीन और जहीन. राजा भी देखे रंक भी. लेकिन मोहन बाबू सबसे अलग हैं. भाजपा का जो नारा था ‘सबका साथ, सबका विकास ‘ मोहन बाबा पर ही लागू होता है. वे सधे हुए नट की तरह सत्ता की रस्सी पर संतुलन करते नजर आ रहे हैं.वे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही राहु केतु बने कैलाश विजयवर्गीय तथा प्रहलाद पटेल को भी साधे हुए हैं. मप्र में सियासत करने वाले राजे -रजवाडों के अलावा पहली बार किसी अखाड़े के नेता को मुख्यमंत्री पद मिला है. मोहन यादव अखाड़े के सभी दाव-पेच जानते हैं. वे अनाडी नहीं खिलाडी है.पार्टी में जो नेता मोहन बाबू को अनाडी समझने की भूल कर रहे हैं, उन्हें आज नही तो कल पछतावा होगा. यादव जी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को अपना आदर्श मानते हैं. इसलिए वे जितने सीधे दिखाई देते हैं उतने हैं नहीं. मुझे लगता है कि मोहन यादव को खो देना आसान नहीं है क्यों वे न तो अति महात्वाकांक्षी हैं और न हडबडी में. इसलिए वे अपनी पूरी पारी करेंगे. जन्मदिन पर मोहन यादव को बहुत -बहुत शुभकामनायें.
श्री राकेश अचल  ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश

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