राजनीतिनामा

सोशल मीडिया पर इंदिरा गाँधी और मोदी की तुलना क्यों !

क्या नरेंद्र मोदी इंदिरा गांधी की तुलना में एक कमजोर प्रधानमंत्री है ! क्या इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश निर्माण के समय जो साहसिक भूमिका निभाई थी आज की सरकार में उतना दमदार निर्णय लेने की क्षमता नहीं है । जी हा बीते दो दिनो से सोशल मीडिया पर यह बहस चल रही है जैसे ही भारत सरकार की ओर से सीजफायर मान लेने की घोषणा हुई वैसे ही पूरा सोशल मीडिया इंदिरा गांधी के तरानों से भर गया। पिछले छह दिन से सरकार का समर्थन कर रहे कांग्रेस समर्थकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की ओर से जारी इंदिरा गांधी की एक पुरानी चिट्ठी वायरल होने लगी।इंदिरा गांधी ने यह चिट्ठी 1971 की लड़ाई के समय अमेरिका के राष्ट्रपति को लिखी थी और उनकी ओर से दिए गए युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज किया था। कांग्रेस इकोसिस्टम के लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पिछले कुछ दिनों से निराशा का माहौल था क्योंकि उनको सरकार का समर्थन करना पड़ रहा था।लेकिन सीजफायर के बाद स्थिति बदल गई। सैकड़ों या हजारों अकाउंट्स पर पाकिस्तान के जनरल नियाजी के भारत के सामने आत्मसमर्पण करने की तस्वीरें शेयर की गईं। दावा किया गया कि भारत अब कभी भी ऐसा दिन नहीं देख पाएगा जब पाकिस्तान के 90 हजार से ज्यादा सैनिकों ने भारत के सामने सरेंडर किया था। भारत ने उस समय बांग्लादेश बनवाया था। दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के दबाव में सीजफायर स्वीकार किया गया है।इंदिरा गांधी को नेता और मौजूदा नेतृत्व को कारोबारी बताने की होड़ भी मची है। सोशल मीडिया पर एंसे कार्टून और मीम्स जमकर वायरल हो रहें है ।

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