सागर के लोगों में गिरिराज जी की तरह सेवा का भाव तो यमुना जी की तरह सरलता भी – इंद्रेश जी

जीवन मे चार पुरुषार्थ प्रमुख होते हैं। पहले तीन हैं धर्म अर्थ और काम इन तीनों को करते करते चौथे का भाव स्वतः ही पैदा