जो लोग सेवानिवृत्ति के बाद बोर होने लगते हैं उनके लिए सिंचाई विभाग के एसडीओ पद से सेवानिवृत्त हुए विश्वामित्र पांडे प्रेरणा स्रोत हो सकते हैं जो सेवानिवृत्ति के बाद लगातार अपने निवास के पीछे खाली स्थान में आम जामुन बेल के पौधे तैयार करते हैं और फिर विभिन्न संस्थाओं को निशुल्क बांटते हैं आज उनके द्वारा बांटे गए पौधों से कई जगह हरियाली छा गई है वास्तव में जो लोग आने वाली पीढ़ी को खुशहाल देखना चाहते हैं उन्हें पानी बचाने और पौधे लगाने का काम पूरी शिद्दत के साथ करना चाहिए जैसा कि पांडे जी कर रहे हैं इसके अलाव वे लोगों को जागरुक भी कर रहे हैं यह स्वभाव बनाना पड़ता है समाज को कुछ देने का पांडे जी सर्विस में रहते हुए भी जब भी फुर्सत मिलती थी ऐसा काम करते आ रहे हैं और अब तो हजारों पौधे बांटने की स्थिति में आ गए जाहिर है।
यदि आप जीवन को सार्थक करना चाहते हैं तो आध्यात्मिक दृष्टि से जहां पूजा और भजन महत्वपूर्ण है वही अध्यात्मिक प्राकृतिक एवं व्यवहार एक रूप में इस समय दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण की संरक्षण की है तो जो जहां भी है कम से कम पांच पौधे लगाने का प्रयत्न जरूर करें जहां चाह वहां राह है जैसा कि विश्वामित्र पांडे कॉलोनी के मकान में खाली पड़ी जगह का सदुपयोग कर रहे हैं जिनके पास खेत है बड़े-बड़े मैदान है उन्हें तो और ज्यादा करना चाहिए जैसा कि मित्र और परिचित पांडे जी के लिए पौधे वाले पांडे जी कहते हैं ऐसे ही कोई पानी वाला बाबा बन जाए कोई पौधे वाला जिससे यह समाज यह धरती पर्यावरण वाली बन जाए।
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