सागर/मकरोनिया के नरवानी रोड पुराना पानी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का गुरुवार को समापन हो गया,समापन दिवस पर कथा व्यास गोपाल कृष्ण शास्त्री श्री धाम वृन्दावन ने,भगवान की अनेक लीलाओं सहित उनके विवाहों का वर्णन किया,व्यास जी ने सुदामा प्रसंग भी सुनाया जिसे सुनकर कथा श्रोता भाव विभोर हो गए,व्यास जी ने बताया की पत्नी सुशीला के बार-बार है,हठ करने पर सुदामा जी भगवान कृष्ण से मिलने द्वारका पुरी पहुंचे जब भगवान को सुदामा जी के आने की खबर मिली तो भगवान सुदामा जी से मिलने भाव विभोर होकर दौड़ पड़े,श्री कृष्ण ने सुदामा जी को अपने महल में लाकर उनका आदर सत्कार किया और उनकी दशा को देखकर भगवान ने अश्रु जल से उनके चरण पखारे,वही सुदामा जी द्वारा लाए गए तंदुल के बदले भगवान ने मन ही मन सुदामा जी को कई लोकों की संपत्ति दान कर दी,व्यास जी ने कहा कि अगर मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी हो,क्योंकि मित्रता में कोई छोटा बड़ा,धनहीन,या धनवान नहीं होता मित्रता इन सबसे ऊपर होती है,और मित्रता का एक अद्वितीय उदाहरण श्री कृष्ण सुदामा जी की मित्रता है।कथा के विश्राम दिवस पर चैन सिंग यादव,आकाश,यादव,जयदीप तिवारी,तेजेंद्र सिंग,निशांत,गौतम,आरती यादव,दयाराम पटेल,जगदीश पटेल,रूपसिंह पटेल,दौलत पटेल,अरविंद पटेल,सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे।
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