समाज

सागर – क्षत्रिय समाज सागर में राजनैतिक वर्चस्व का द्धंद हुआ तेज

बुंदेलखंड की राजधानी सागर हमेशा की तरह फिर चर्चाओं में है लेकिन इस बार चर्चाओं का कारण प्रदेश स्तर पर सत्ता और संगठन में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर नहीं है और न ही बड़े विकास कार्यो की घोषणाओं को लेकर है मोहन यादव सरकार आने के बाद डेढ दशकों से चमकने वाले सागर की राजनैतिक चमक फीकी पड़ चुकी है लेकिन सागर केे दो बड़े नेताओं केबिनेट मंत्री गोविंद सिंह और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की राजनैतिक प्रतिस्पर्धा और गुटबाजी जरूर चर्चाओं में बनी हुई है । मध्यप्रदेश में सत्ता परिर्वतन और मोहन यादव सरकार मंत्रीमंडल गठन के साथ ही प्रदेश की राजनीति में दिग्गज नेता रहे गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह का राजनैतिक कद कम हुआ था तो शिवराज सरकार में बड़े विभाग संभाल चुके सिंधिया गुट के गोविंद सिंह राजपूत को भी मोहन मंत्रीमंडल में एडजेस्ट ही किया गया । बीते एक साल में ऐसे कई मौके आए जब भूपेंद्र और भार्गव की नाराजगी की खबरें और सागर जिले मे गुटबाजी की खबरें प्रदेश भर में सुर्खियां बनी । फिर चाहे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में क्षेत्रीय नेताओं को तवज्जो और नाराजगी की खबरें हो , या नये राजनैतिक हालातों में पुराने साथियों की जुगलबंदी , ताजा प्रकरण सागर जिले में नये सिरे से क्षत्रिय समाज के सामाजिक संगठन जिला क्षत्रिय महासभा के गठन को लेकर है जिसमें अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजे लखन सिंह बामोरा का मनोनयन किया गया क्षत्रिय महासभा के नये अध्यक्ष ने जिले भर से क्षत्रिय समाज के पदाधिकारियों की नियुक्ति की तथा पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित वरिष्ठजनों का एक संरक्षक मंडल भी गठित किया ।
इस प्रकरण के बाद मंत्री गोविंद सिंह गुट सक्रिय हुआ और और एक बैठक कर क्षत्रिय महासभा के नये अध्यक्ष और कार्यकारिणी को अवैध घोषित करते हुए आरोप लगया कि यह नियुक्तियां क्षत्रिय समाज के वरिष्ठो को विश्वास में लिये बिना एक राजनैतिक परिवार द्धारा छल से की गई है जिससे समाज में असंतोष व्याप्त है बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी गई की जल्द ही क्षत्रिय समाज का एक महाधिवेशन आयोजित किया जायेगा जिसमें अध्यक्ष पद की नियुक्ति निर्वाचन के माध्यम से की जायेगी और अध्यक्ष किसी राजनैतिक परिवार का सदस्य नहीं होगा। इस सारे मामले का लब्बोलुआब यह है कि सागर जिले में दो कददावर नेताओं के बीच चल रही राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई अब क्षत्रिय समाज पर एकाधिकार पर जा टिकी है।

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