कलमदार

मध्यप्रदेश राजनीतिनामा – कहीं खुशी कहीं गम फिर भी 2028 के लिए बढ़ाना है दम

बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम आने के बाद प्रदेश में भाजपा नेता और कार्यकर्ता जहां उत्साहित है वही विपक्षी दल कांग्रेस गम में है लेकिन इसके बावजूद भाजपा जहां अति उत्साह में नहीं रहना चाहती वहीं कांग्रेस निराशा में नहीं डूबना चाहती दोनों ही दल नये सिरे से प्रदेश में मिशन 2028 के लिए तैयारी में जुट गए। दरअसल मध्य प्रदेश की राजनीतिक स्थिति उत्तर प्रदेश बिहार जैसे राज्यों से अलग है दो दलीय व्यवस्था है तीसरे दल की कभी संभावनाएं ही नहीं बन पाई ऐसे में किसी एक दल की अति उत्साह में थी जब 2018 में कांग्रेस ने अपने क्षत्रप नेताओं की एक सूत्र में बांधा और 15 वर्षों के रद ही सही पार्टी सत्ता में आ गई जरा सी चूक सामने वाले को सत्ता में आने का मौका दे देती है जैसा की भाजपा 2003 के बाद से लगातार चुनाव जीत रही थी यह बात और है कि वह है सरकार को संभाल नहीं पाई और 15 महीना के बाद यह सरकार गिर गई तब से भाजपा और सतर्क एवं सावधान हो गई है अब वह किसी भी प्रकार के कॉन्फिडेंस में नहीं रहना चाहती चुनाव जीतने के लिए ओवर एड़ी चोटी का जोर लगाती है।
यही कारण है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की अपेक्षा से भी ज्यादा सीटें मिल गई अभी पार्टी का जीत का सिलसिला चल रहा है चुनाव के पहले माहौल कुछ भी रहे भाजपा का मैनेजमेंट इतना तगड़ा है की अंतिम समय वह बाजो पलट लेती है हाल ही में बिहार विधानसभा के आम चुनाव में जिस तरह से बड़ी जीत पार्टी ने हासिल की है लेकिन इसके बाद भी पार्टी संगठन के कर्ताधर्ता और रणनीतिकार पूरे देश में पार्टी कार्यकर्ताओं को अतिउत्साह में नहीं आने का संदेश दे रहे यही कारण की पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लंबे समय से टाला जा रहा है अब इस पर फैसला होगा साथ ही प्रदेश में विभिन्न निगम मंडलों में नियुक्तियों और मंत्रिमंडल का विस्तार भी काफी गहन चिंतन मनन के बाद किया जा रहा है लेकिन पार्टी का एकधड़ा पूरी तरह से गहन मतदाता पुनरीक्षण के कार्य में लगा है जिससे कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ ना हो पार्टी ना तो कभी एंटी इनकमवेसी पनपने देना चाहती है और ना ही जना आधार वाले नेताओं को उपेक्षित रखती है रणनीति के तहत कुछ दिन के लिए जरूर विश्राम दे दिया जाता है लेकिन चुनाव के पहले सभी को जिम्मेदारियां दे दी जाती है भाजपा में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है और एक-एक बिंदु पर संदे कदमों से आगेबढ़ रही है क्योंकि मध्य प्रदेश पार्टी का सबसे मजबूत संगठन वाला प्रदेश माना जाता है और इसमें पार्टी किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आने देना चाहती।उधर दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के नेता कार्यकर्ता बिहार चुनाव में मिली करारी पराजय के बाद निराश जरूर हुई लेकिन पार्टी के नेता होसला अफजाई कर रहे हैं और पार्टी प्रशिक्षण को एक अस्त्र के रूप में उपयोग कर रहे हैं मांडू में विधायकों का प्रशिक्षण पचमढ़ी में कांग्रेस जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण हो चुका है अब पार्टी जिला ब्लॉक और विधानसभा में प्रशिक्षण की तैयारी कर रही है जिसमें बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा सके और तीनों स्तर पर प्रशिक्षण होने के बाद ब्लॉक को जिला कार्यकारिणी बनेगी जिसमें प्रशिक्षित कार्यकर्ता शामिल होंगे।कुल मिलाकर विहार चुनाव के परिणाम के बाद भाजपा उत्साह में जरूर है लेकिन प्रदेश के मामले में सतर्क और सावधान भी है वहीं कांग्रेस में भले ही निराशा हुई हो लेकिन प्रदेश में एक बार फिर उम्मीदों के दीए जलाने में जुट गई है।

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