यहाँ मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला में श्कफ सिरप कहे जाने वाली दवा के सेवन से बच्चों की मृत्यु के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है छिंदवाड़ा जिले में अब तक नौ बच्चे गुर्दे किडनी की खराबी से मर चुके हैं। उनकी उम्र ज़्यादातर पाँच साल से कम है। संशयित सिरप पर संदिग्ध हानिकारक रसायन पाए जाने की रिपोर्ट आयी है। वर्तमान में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को एडवायज़री जारी की है कि बच्चों में कफ और कफ.सिरप का प्रयोग सोच.समझ कर और आवश्यकतानुसार ही हो। विपक्ष ने इस घटना को दवा नियंत्रण तंत्र की विफलता बताया है और सवाल उठाये हैं कि कैसे ऐसी दवाएँ बाज़ार में पहुँच पाईं।कई लोगों ने यह पूछा है कि सरकारी अस्पतालों और क्लीनिक्स में दवाओं की जांच क्यों नियमित नहीं होती।यह घटना केवल एक स्वास्थ्य आपदा नहीं है बल्कि नियमों की अवहेलना दवा सुरक्षा के तंत्र की कमी और जनता के प्रति ज़िम्मेदारी का सवाल भी है।इस दर्दनाक घटना ने सरकारए स्वास्थ्य तंत्र और संपूर्ण समाज को यह झकझोर कर हिला दिया है कि बच्चों की जान बचाने के लिए ज़रूरी है कि चिकित्सकीय सुरक्षा को किसी भी तरह से कमज़ोर न होने दिया जाए। उम्मीद है कि इस घटना से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी त्रासदियाँ न दोबारा हों।
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