सागर सपूत स्वर्गीय विठ्ठल भाई पटेल के विविध आयामी व्यक्तित्व को किसी एक किताब या लेख में समेटना मुश्किल ही नहीं न मुमकिन है। उनके विराट किंतु सरल व्यक्तित्व के कुछ अंशों की चर्चा ही बस हम यहां कर सकते हैं। सत्ता (राजनीति) और सिनेमा यह दोनों ही ऐसे क्षेत्र है जिनमें ग्लैमर (चकाचौंध) बहुत है। विठ्ठल भाई ने मूलतः इन दोनों ही क्षेत्र में काम किया।और ऐसा किया कि उनके नाम की गूंज आज भी देशभर में होती है और आगे भी होती रहेगी। जहां तक संपत्ति की बात है तो विठ्ठल भाई मुंह में चांदी की चम्मच लेकर ही जन्मे थे। सागर में सेठ लल्लू भाई पटेल के यहां तीसरी संतान के रूप में 21 मई 1936 जन्मे ।विठ्ठल भाई के पिता उस ज़माने के जाने माने उद्योगपति थे ।यह बात और है कि वे उद्योगपति होते हुए भी संत कहलाते थे ।उनके संस्कार व कर्म ऐसे थे कि सागर से लेकर गुजरात तक लोग उन्हें संत लल्लू भाई के नाम से पुकारते थे। यही संस्कार विठ्ठल भाई पर ऐसे रचे की चकाचौंध की दुनिया में वे ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी संत विठ्ठल भाई कहलाने लगे थे । अमीर घराने मै जन्म लेने,राजनीति में ऊंचाई पर पहुंचने(9 साल मंत्री रहे) और फिल्म इंडस्ट्री में गीतकार के रूप में पहचान बनाकर राज कपूर सहित सभी चोटी के स्टारों से दोस्त यारी निभाने के बावजूद विठ्ठल भाई को इन क्षेत्रों में पनपने वाली तमाम बुराइयां छू भी नहीं सकी। अमीरी कभी उनके सर चढ़कर नहीं बोली ।लंबे समय तक राजनीति करने पर भी उनके लिए कोई ईमानदारी के पथ से डिगा नहीं सका। फिल्म इंडस्ट्री में लगातार सक्रिय रहकर भी उन्होंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया मुझे लगता है कि इन तीन विरोधाभास ने ही विठ्ठल भाई को संत विठ्ठल भाई बनने का अवसर दिया । इसके साथ ही साहित्य सृजन , पदयात्राएं हाथ में झाड़ू थामकर सड़कों पर सफाई अभियान ,किशोर कुमार की समाधी हो या मुक्ति धामों का जीवाणुधार,हाथ में डिब्बा लेकर एक एक रूपए एकत्र करने वे सड़क पर निकल पड़ते थे। इस तरह के सारे काम एक समाजसेवी के साथ उनको सार्वजनिक जीवन के संत के रूप में स्वताह स्थापित करते चले गए । ऐसा नहीं विठ्ठल भाई में इस चकाचौंध (ग्लैमर) को नहीं जिया , बल्कि ऐसा जीया कि दूसरों के लिए यह आज भी नज़ीर है। फिल्म स्टारों और बड़े बड़े राजनीतिज्ञों के लिए विठ्ठल भाई ने सैकड़ों पार्टियां आयोजित की पर उनमें कभी खुद पूरी तरह नहीं डूबे। वैभव के प्रतीक कारें जब चंद लोगों के पास होती थी तब शौकीन विठ्ठल भाई कुशल कार चालक के रूप में भी अपने आप को स्थापित कर गए।1968 मध्य प्रदेश की पहली कार रैली आयोजित की गई इस रैली में माधव राव सिंधिया सहित तबके नाम चीन लोगों ने भाग लिया था। विठ्ठल भाई पटेल ने इस कार रैली को जीतकर प्रथम स्थान हासिल किया था तब एसी धूम मची की उनको देखना हज़ारों लोग सड़कों पर थे । कहने का आशय यह है कि विठ्ठल भाई ने अपने जीवन में शोहरत की हर सीढ़ी को अपने कौशल से नापते हुए ऊंचाई पर पहुंच कर भी अहंकार को जगह नहीं दी । यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी । विभिन्न क्षेत्रों राजनीति, सिनेमा, साहित्य सृजन,समाजसेवा आदि में काम करते हुए वे निरंतर सरल सहज और विनम्र होते चले गए । ऐसे थे विठ्ठल भाई पटेल नोटों से भरा ब्रीफकेस बिना देखे ही लौटा दिया था विठ्ठल भाई पटेल जब मध्य प्रदेश के उद्योग मंत्री थे तब एक दिन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया का उनके पास फोन आया सिंधिया जी ने उनसे कहा कि ललित मोदी ने राज्य में किसी उद्योग के लिए अनुमति मांगी है यह लाइसेंस उनको देना है । विठ्ठल भाई ने उनसे जवाब मैं कहा कि आपने कहा है तो समझो लाइसेंस दे दिया। विठ्ठल भाई ने विभाग के अफसरों को बुलाकर मामला समझा और निर्देश दिए कि इस अनुमति में नियम कायदों का पूरी तरह पालन हो । लाइसेंस जल्द से जल्द दिया जाए । प्रक्रिया पूरी कर उनको लाइसेंस दे दिया गया। करीब 15– 20 दिन बाद ललित मोदी विठ्ठल भाई से मिलने पहुंचे। उनके हाथ में एक ब्रीफकेस था वे विठ्ठल भाई से बोले श्रीमान जी लाइसेंस मिल गया है और यह आपके लिए है। विठ्ठल भाई पहले ही समझ गए थे कि ब्रीफ केस नोटों से भरा है । उन्होंने इशारे से कहा कि ललित इसे अपने पास रखो माना कि मैं अपने हजार गुना कम अमीर हु लेकिन मंत्री इसीलिए नहीं बना कि पैसे लेकर काम करूं और ना ही यह मेरे संस्कार है। विठ्ठल भाई का जवाब सुनकर ललित मोदी कुछ देर अवाक रहे फिर उनका धन्यवाद करते हुए चले गए। खुद विठ्ठल भाई ने अपने संस्मरण में इसका उल्लेख किया है। मित्रों क्या आप आजके राजनेताओं से यह अपेक्षा कर सकते है। आंधी फिल्म को रिलीज कराने, इंद्रा गांधी के पास पहुंचे,शोले भी रिलीज कराई। श्रीमती इंद्र गांधी तब देश में यह वो नाम था जिनसे बात करने में बड़े से बड़े लीडर हिचकते थे।लेकिन विठ्ठल भाई आंधी फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए उनके पास पहुंच गए थे। निर्देशक गुलज़ार और निर्माता जे ओमप्रकाश की फिल्म आंधी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर बनी थी । इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।आरोप था कि फिल्म में सुचित्रा सेन द्वारा निभाया गया किरदार इंद्रा जी से मिलता जुलता है । विठ्ठल भाई ने इंद्र जी से आग्रह किया कि एक बार आप खुद फिल्म देख लीजिए फिर फैसला कीजिए ।कुछ दिन बाद आंधी रिलीज होगई। इसी तरह हिंदी सिनेमा के इतिहास की मील का पत्थर साबित हुई फिल्म शोले की रिलीज रोक दी गई थी ।इस फिल्म में काफी हिंसा है उस दौर में सेंसरबोर्ड ने इसे बहुत ज्यादा हिंसा मानते हुए रोक दिया था। निर्माता रमेश सिप्पी के आग्रह पर विठ्ठल भाई ने शोले को लेकर विद्याचरण शुक्ल से बात की उन दिनों वे केंद्रीय मंत्री थे।इसके बाद आपत्तियों का निराकरण कर शोले भी रिलाज हो गई जो आज भी सुपर हिट है । इन दोनों उदहारण से आप अंदाजा लगाएं कि राजनीति और फ़िल्मों में विठ्ठल भाई का क्या योगदान रहा है। विठ्ठल भाई ने 565 दिन तक लगातार सफाई अभियान चलाया ।अपने क्षेत्र सहित देश प्रदेश की राजधानी तक पढ़ यात्राएं कि ।महान गायक किशोर कुमार की समाधी के लिए एक एक रुपए एकतृत करने सड़क पर उतर गए कई कविता संग्रह और फिल्मों में सुपर हिट गीत लिखे।
श्री प्रवीण पांडेय ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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