प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से दबदबा बनाए रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थक पिछले दो वर्षों से कमलनाथ की सक्रियता का इंतजार कर रहे थे दिल्ली जाकर भी अनुरोध कर रहे थे तब जाकर अब चुनिंदा समर्थकों की भोपाल में बैठक हो चुकी है और अब कमलनाथ नकुलनाथ को पूरे प्रदेश में सक्रीय करेंगे। दरअसल तीन दशक से भी ज्यादा प्रदेश की काग्रेस की राजनीति में कमलनाथ का दवदवा रहा है खासकर दिग्विजय सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहते और मुख्यमंत्री रहते बड़े भाई की भूमिका में रहने वाले कमलनाथ अपने समर्थकों को सत्ता और संगठन में उपकृत कराने में कामयाच रहे हैं पार्षद और सरपंच जैसे पदों पर रहने वालों को कमलनाथ ने विधायक को मंत्री बनवाया है यहीं कारण है कि पूरे प्रदेश में उनके कट्टर समर्थकों की मोजूदगी है और पिछले दो वर्षों से यह समर्थक अपने आप को अनाथ जैसा महसूस कर रहे हैं क्योंकि 2023 के विधानसभा के आम चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी हाई कमान में कमलनाथ की जगह जीत पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और तब से कमलनाथ प्रदेश की राजनीति से लगभग दूरी जैसी बनाए हुए हैं कभी कभी महत्वपूर्ण बैठकों में भी वे वर्चुअल जुड़े है कमलनाथ को प्रदेश में सक्रिय करने के लिए उनके कुछ समर्थक दिल्ली जाकर उनसे प्रदेश में सक्रिय होने का अनुरोध करते आ रहे हैं समर्थकों का यह भी कहना था यदि आप सक्रिय नहीं हो रहे तो नकुलनाथ को सक्रिय करिए बीच में कुछ प्रोग्राम भी बने लेकिन वे कुछ कारणों से निरस्त होते रहे लेकिन हाल हो में जब जहरीले कफ सिरप पीने से छिंदवाड़ा इलाके में बच्चों की मौत हुई तब कमलनाथ नकुलनाथ के साथ पीडित परिवारों से मिले और वहां से लौटकर जब भोपाल आए तब तक उनके विश्वसनीय चुनिदा समर्थकों को सूचना हो चुकी थी और भोपाल के बंगले पर एक बैठक हुई जिसमें वर्तमान विधायक पूर्व विधायक पूर्व मंत्री और संगठन से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए इस बैठक की खास बात यह रहते की कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ काफी उत्साहित दिखे और यह भी लगभग तय ही गया है कि अब पूरे प्रदेश में सुख दुख का अवसर जहां भी आएगा नकुलनाथ वहां पहुंचेंगे फिलहाल शक्ति प्रदर्शन नाहीं होगा लेकिन समर्थकों को एकजुट रखना उन्हें सक्रिय करने की कसरत जारी रहंगी ।
फिलहाल इसके लिए पूर्व मंत्री साजन यां को एक तरह से अधिकृत किया गया है कि वे पूरे प्रदेश में कमलनाथ समर्थकों से बात करते रहें और जहां जरूरी हो वहां नकुलनाथ को लेकर पहुंचे और भविष्य में इस तरह की बैठकें होती रहेगी और इसमें और भी समर्थकों को बुलाया जाएगा इस बैठक में गुटवाजी की कोई बात नहीं हुई ना ही किसी की आलोचना हुई सबका एक ही फोकस था की सभी समर्थक चाहते हैं कि आप प्रदेश में सक्रिय रहे या फिर नकुलनाथ को सक्रिय करें। बहरहाल प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति हमेशा क्षेत्रयों के बीच बटी रही है और जिस भी क्षत्रप की निर्थक्रयता हुई या उसकी विरासत को संभालने वाला समय रहते तैयार नहीं किया गया तो फिर उसकी राजनीति का अंत हो गया और समर्थक जहां जगह मिली वहां शिफ्ट हो गए आज प्रदेश की राजनीति में विद्या चरण शुक्ला श्यामा चरण शुक्ला मोतीलाल चोरा का कोई नाम लेने वाला नहीं है माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत को ज्योतिरदित्य संभाले हुए हैं लेकिन वे भाजपा में चले गए अर्जुन सिंह की राजनीतिक विरासत की अजय सिह संभालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अर्जुन सिंह जैसा दबदबा और चतुराई की कमी के चलते विध्य के सीमित क्षेत्र तक सिमटते जा रहे है सुभाष यादव की विरासत को अरुण यादव सीमित समर्थकों के बीच ही संभाल पा रहे हैं। इस बीच दिग्विजय सिंह जरूर बड़े करीने से अपने मजबूत उत्तराधिकारी के रूप में जयवर्धन सिंह को स्थापित कर रहे है इस तरह के उदाहरण देकर भी कमलनाथ समर्थको ने कमलनाथ को लगभग इस बात पर सहमत कर लिया है कि अब और निर्षक्रयता प्रदेश में उनके कुनबे को विखरने पर मजबूर कर सकती है और फिर नकुलनाथ को प्रदेश की राजनीति में स्थापित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर एक तरफ जहां कमलनाथ समर्थक अपने भविष्य को लेकर निश्चित होना चाहते हैं क्योंकि जब तक कमलनाथ प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं तब तक उनके समर्थकों को सत्ता और संगठन में पर्याप्त मौका मिला है दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री काल में कमलनाथ समर्थक आधा दर्जन मंत्री शामिल रहे हैं और इतने ही विभिन्न निगम मंडलों में उनके समर्थक अध्यक्ष उपाध्यक्ष रहे हैं। मंत्रिमंडल में ऊर्जा और पीएचई विभाग तो जैसे कमलनाथ समर्थकों के नाम ही आवंटित राहते थे जबकि इन दो वर्षों में कमलनाथ समर्थकों को छोटे छोटे पदों के लिए भी संघर्ष करना पढ़ा और दूसरी तरफ कमलनाथ को भी अब एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं भविष्य में नकुलनाथ की मजबूत नेता के तौर पर स्थापित करने की बात समझ में आ गई और यही कारण है कि भोपाल स्थित उनके निवास पर जो बैठक हुई है जिसमें प्रमुख रूप से विधायक लखन घनवंरिया रामसिया भारती दिनेश जैन बास और मधु भगत की पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा यादव तरुण भनीत बाला बच्चन सुखदेव पांसे पूर्व विधायक संजय शर्मा सुनील जायसवाल संजय यादव के साथ-साथ नीरज सिंह बघेल मनोज राजानी मन्नू सरदार भी उपस्थित थे और इस बैठक में जो सहमति बनी उसके आधार पर अब कमलनाथ के साथ साधक परे सज्जन सिंह वर्मा के हाथों में रहेगी और जैसे-जैसे प्रदेश में प्रदेश में सक्रिय रहेंगे और फिलहाल समर्थकों की पूरी कमान विधानसभा के आम चुनाव करीब आते जाएंगे वैसे-वैसे सक्रियता भी बढ़ेगी और समर्थकों को एकजुट करने की कवायद भी तेज होगी।
श्री देवदत्त दुबे ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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