पूरे देश के साथ-साथ प्रदेश में भी आज विजयादशमी के दिन संघ का पथ संचलन पूरे उत्साह के साथ होगा जिस तरह से क्रिकेट में एक दो रन लेकर के शतक पूरा करने के बाद खिलाड़ी पिच दौड़ लगाता है कुछ वैसी ही संघ की स्थिति है। दरअसल संघ सुरक्षात्मक तरीके से धीरे-धीरे कार्यों का विस्तार किया नए-नए अनुसांगिक संगठनों का सृजन किया और धीरे-धीरे समाज में न केवल स्वीकृति बढाई वरन एक सज्जन शक्ति की इमेज भी बनाई संघ का भाजपा एक अनुसांगिक संगठन है और भाजपा देश में और अनेक राज्यों में सरकार में है भाजपा सरकारों में संघ को अनुकूलता होती है उनके दिशा निर्देशों का पालन भी होता है लेकिन इसके बावजूद संघ पर सरकार का ठप्पा नहीं लग पाया ओर संघ के खिलाफ कोई एंटी इनकंबेंसी नहीं बनी कई महत्वपूर्ण निर्णय में कई बार संघ की इच्छा नहीं मानी तब भी संघ ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक नहीं होने दी संघ पदाधिकारी प्राय यही कहते रहे भाजपा एक राजनीतिक संगठन है जब कभी वह सलाह मांगता है तो हम सलाह देते हैं माने या ना माने यह भाजपा के ऊपर है संघ कभी राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता हम जो भी सलाह देते हैं वह समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए देते हैं।
बहरहाल शताब्दी वर्ष पर दशहरा के दिन पथ संचलन के लिए पिछले दो महीने से तैयारी चल रही है पिछले दो महीने में करीब 50000 के लगभग नए स्वयंसेवक जोड़े गए हैं भोपाल विभाग के पांच जिलों में लगभग पौने चार सौ स्थानों पर पथ संचलन निकाले जाने की योजना है यह पथ संचलन आज 2 अक्टूबर से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक निकल जाएंगे भोपाल विभाग के अंतर्गत पांच जिलों में 26 नगर और 6 खंड है उनके अंतर्गत 279 बस्ती और भोपाल विभाग के ग्रामीण क्षेत्र में 94 मंडल प्रत्येक मंडल में 8 से 10 गांव शामिल है संघ शताब्दी वर्ष में इन्हीं बस्ती और मंडल के 373 स्थानों पर पथ संचलन निकाला जाएगा। भोपाल विभाग में करीब 700 टोली पथ संचलन के लिए नए और पुराने स्वयंसेवकों की सूची बनाने में लगा हुआ है करीब 80000 पुराने स्वयंसेवक है और लगभग 70000 नए स्वयंसेवक जुड़े गए हैं जिनका गणवेश भी अभी तैयार कराया गया है यह सब कार्य इतने करीने से किया गया कि कहीं कोई हलचल भी नहीं हुई और आज से जब सड़कों पर पथ संचलन के लिए स्वयंसेवक निकलेंगे तब लोगों को आभास होगा की तैयारी कितनी गंभीरता से की गई है। कुल मिलाकर किसी भी संस्था के लिए शून्य से शिखर पर पहुंचना और इस दौरान अपने आप को अपने सद्कार्यों को 100 वर्ष तक सीमित रखना एक ऐसी उपलब्धि है जो भारत संघ अंदर ही अंदर अपनी उपलब्धियां को लेकर उत्साहित है और आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित है लेकिन इस उत्साही दिन में भी वह संयम के प्रति स्वीकृति बनाए हुए हैं।
श्री देवदत्त दुबे ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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